राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
बस भूल जाओ!
जो तुम्हारी क़दर नहीं करता,
उसे दिल से हटा दो।
जो तुम्हारी साँस की कीमत नहीं जानता,
उसे यादों से मिटा दो।
कुछ लोग तो स्वार्थी छाया होते ,
जब धूप हो तब साथ नहीं चलते,
अँधेरा घिरे, तो खुद ग़ायब हो जाते हैं,
ऐसे लोगों को बस भूल जाओ।
तुम्हारी कीमत वो ही समझेगा,
जो तुम्हारे टूटने में भी साथ खड़ा रहे।
जो तुम्हारी खामोशी में भी बात समझ ले,
बाक़ी सब तो बस भीड़ हैं, उन्हें छोड़ दो।
अपनी अहमियत खुद पहचानो, यार!
खुद को कम मत आँको।
जो तुम्हें नहीं चाहता,
उसकी याद में अपनी रातें मत गँवाओ।
भूल जाओ उन्हें,
जो तुम्हारी मौजूदगी, हल्के में लेते हैं।
तो खुद को इतना ऊँचा रखो,
कि उनकी कमी कभी महसूस न हो।
सच्ची कदर वही है,
जो बिना माँगे मिलती है।
बाकी सब तो झूठा शोर है,
उसे चुपचाप भूल जाओ।







