हेमचंद्र सकलानी
विकास नगर, देहरादून
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
—– देश के माथे पर जो सबसे सुंदर बिंदी है ——
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देश के माथे पर, चमकती जो सबसे
सुंदर बिंदी है
और नहीं कोई वही तो हमारी
मातृ भाषा हिंदी है।
कश्मीर से कन्याकुमारी,
कच्छ से अरुणांचल तक
एक सूत्र में हमें, बाँधा जिसने,
वह हमारी हिंदी है।
निर्मल सरल सुंदर बहती पवित्र पावनी गंगा सी,
और नहीं कोई सरस्वती की बेटी हमारी हिंदी है।
स्वतंत्रता की ज्योति जलाई जिसने जन-जन में
संस्कृति की गौरव गाथा, पहचान हमारी हिंदी है।
जाति भाषा धर्म क्षेत्रवाद में बंट
जाता देश हमारा,
दिल में हमारे, तिरंगे सी न फहराती
अगर हिंदी है।
हिंदी के तट पर ही, पल्लवित पुष्पित हुए हैं हम,
शिखरों से संयुक्त राष्ट्र तक लहराई
हमारी हिंदी है।
शब्दों के सारे रंगों से बनती जो
सुंदर इंद्रधनुष् सी
बिखराती सुगंध फूलों सी,
वह रंग बिरंगी हिंदी है।
गुरुमुखी बंगाली कन्नड़ तमिल
डोगरी तेलुगू जैसी,
जिसकी बहनें, कैसे कह दें
हम वह बेचारी हिंदी है।







