राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
तुम्ही बताओ
तुझे प्यार किया था,
बदनाम कैसे करता !
दिल में बसाया था जैसे कोई मस्जिद,
नमाज़ पढ़ी तेरे नाम की हर साँस में।
आँखों में तेरे सपने सजाए थे रात-दिन,
लोग कहते रहे पागल है, दीवाना है।
तुझे प्यार किया था,
बदनाम कैसे करता!
हाथों से तेरा नाम लिखा दीवारों पर,
वही दीवारें गवाह बन गईं मेरी बेइज़्ज़ती की।
जो बात दिल में थी, ज़ुबान पर आ गई,
दुनिया ने कहा ये आशिकी बेहयाई है।
तुझे प्यार किया था,
बदनाम कैसे करता !
प्यार तो पाक था, जैसे बारिश की बूँद,
मगर शहर के लोग ने कीचड़ बना दिया।
तेरी एक मुस्कान मेरी पूरी दुनिया थी,
उन्होंने कहा ये रिश्ता गलत है, गुनाह है।
अब जब तन्हाई में बैठता हूँ,
तो सिर्फ एक सवाल रह जाता है
तुझे प्यार किया था,
बदनाम कैसे करता !







