कवयित्री चन्द्रमती चतुर्वेदी (चन्दू)
बस्ती, अयोध्या धाम
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
हर किसी को अपना समझना आसान नहीं, हर मुस्कान के पीछे सच्चाई हो, यह बात नहीं।
वक्त पड़े तो अपने भी बदल जाते हैं, मीठे बोलों वाले भी छल जाते हैं। जिसने मुश्किल में थामा हो हाथ, वही सच्चा अपना, वही रिश्ते की बात।
सुख में तो दुनिया साथ खड़ी मिलती है, दुख में अपनों की पहचान बड़ीमुस्किल से मिलती है। जो आँसू देखकर आँख न फेर पाए, वही अपना कहलाने का हक जताए।
धन-दौलत से रिश्ते खरीदे नहीं जाते, सच्चे रिश्ते बाजार में मोल लिए नहीं जाते। जिसके मन में न स्वार्थ, न कोई व्यापार, वही रिश्तों में रखता सच्चा प्यार।
समय बदलता है, चेहरे बदल जाते हैं, कल के अपने आज पराए हो जाते हैं। इसलिए दिल सबके आगे खोलना नहीं, हर किसी को अपना राज बोलना नहीं।
चन्द्रमती कहती, इतना रखना ध्यान, सच्चे रिश्तों से ही बढ़ता अपना मान। वक्त बताएगा कौन अपना, कौन बेगाना, मुश्किल में जो साथ रहे, वही सच्चा जमाना।
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बुरी बात नहीं, बताना दिल की बात,
अगर सुनने वाला सच्चा हो किरदार।
दिल में दर्द छुपाकर रखना अच्छी बात नहीं, हर किसी को अपना समझना भी अच्छी बात नहीं। जिसके आगे खोलो मन का सारा संसार, अगर सुनने वाला सच्चा हो किरदार।
आँखों की भाषा हर कोई पढ़ता नहीं, टूटे मन को हर कोई समझता नहीं। जिससे मिले दिल को सच्चा-सा करार, अगर सुनने वाला सच्चा हो किरदार।
अपनेपन का भेष लिए मिलते हैं कई, मीठी बातें करते हैं, पर नीयत होती है नई। ऐसे लोगों से रहना थोड़ा होशियार, अगर सुनने वाला सच्चा हो किरदार।
दर्द कहो तो दर्द तुम्हारा समझे जो, गिरते हुए को हाथ बढ़ाकर थामे जो। उसके आगे कह देना मन की हर बात, अगर सुनने वाला सच्चा हो किरदार।
‘चन्द्रमती’ कहती, मन को यूँ न मार, सच्चे रिश्ते ही जीवन का हैं आधार। दिल की बात कह देना सोच-विचार, अगर सुनने वाला सच्चा हो किरदार।







