प्रा.डॉ. शंकर घनशामदास अंदानी
(आचार्य, सी ए.)
अहिल्या नगर, महाराष्ट्र
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
माँ दुर्गा की स्तुति
भक्तिभाव सुंदर गीत
जय-जय अम्बे, जय जगदम्बे, महिमा तेरी न्यारी माँ, तेरे चरणों में मिलता है, सुख-शांति उजियारी माँ।
लाल चुनरिया शोभा देती, मुख पर तेज निराला है, तेरी कृपा से माँ जग में, हर जीवन खुशहाला है।
सिंह सवारी करने वाली, तू शक्ति का भंडार है, दीन-दुखी के कष्ट हरने, करती सबका उद्धार है।
हाथों में त्रिशूल विराजे, नयनों में करुणा धारा, तेरे नाम से मिट जाता है, संकट अंधियारा सारा।
शैलपुत्री तू मंगलकारी, ब्रह्मचारिणी वरदानी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा माता, महिमा तेरी कल्याणी।
स्कंदमाता ममता बरसाएँ, कात्यायनी बल देती, कालरात्रि भय दूर भगाएँ, महागौरी सुख देती।
सिद्धिदात्री सिद्धि प्रदानें, भक्तों का सम्मान करो, भटके हुए हृदय को माता, सन्मार्ग का ज्ञान भरो।
तेरी ज्योति जगमग करती, मन-मंदिर के द्वारे माँ, तेरे आशीषों से महके, जीवन के सब गलियारे माँ।
अहंकार और द्वेष मिटाकर, प्रेम का दीप जलाएँ, तेरी भक्ति में लीन होकर, मानवता अपनाएँ।
जय दुर्गे, जय भवानी माता, तेरा गुणगान करें, जन्म-जन्म तक हे जगजननी, तेरे चरणों में वंदन करें।







