मंजू अशोक राजाभोज
भंडारा (महाराष्ट्र)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
“एक दशहरा ऐसा भी”
एक रावण त्रेतायुग में जला था कभी।
कुछ रावण इस युग में जलाएं हम सभी।
अहंकार, घृणा, द्वेष और भृष्ट मति।
कई रावण आज भी जिंदा है अभी।
उस युग के रावण की थी एक खास बात।
उसने सीता माता का हरण तो था जरूर किया।
लेकिन उनकी मर्जी के खिलाफ उन्हें न था कभी छुआ।
फिर भी उसे उसकी गलती की थी सजा मिली।
आज के इस युग में है कई रावण ऐसे।
जो नारियों के साथ क्या कुछ न है कर गुजरते।
फिर भी खुले आम है घूमते नजर आते।
क्यों न ऐसे रावणों का दशहरा में दहन हम करें।
तभी तो सच्चा दशहरा हम जाने।
आओ हम सब प्रण यह करें।
दुनियाँ में जो हो रहा भृष्टाचार,
उसे मिलकर खत्म क्यों न हम करें।
इस तरह दशहरा का प्रारूप हम सभी बदले।
आज से अभी से इसकी शुरुवात हम करें।
हर इंसान के अंदर के रावण का दहन हम करें।
तभी तो दशहरे की सही शुभकामनाएं हम दे सके।।







