राजकुमार कुम्भज
जवाहरमार्ग, इन्दौर
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
नेहासिंह राठौर और ABP न्यूज चैनल। ___________________ ****************
नेहासिंह राठौर एक सुप्रसिद्ध, सम्मानित व सृजनशील भोजपुरी जय लोकगीत गायिका हैं और ABP न्यूज चैनल का पूरा नाम “आनंद बाजार पत्रिका” है।
आनंद बाजार पत्रिका वह अखबार समूह है, जिसकी ख्याति कभी सत्य की सत्ता के लिए देशभर में सर्वाधिक सर्वोपरि रहा करती थी। आनंद बाजार पत्रिका समूह के पत्र-पत्रिकाओं में छपनेवाले समाचार को विश्वसनीय और सत्य स्वीकार कर लिया जाता था। जो खबर यहाँ नहीं है, वह खबर तो हो सकती है, लेकिन भरोसे लायक खबर नहीं है।
जिस अखबार समूह को देश के साक्षर नागरिकों-पाठकों ने कभी इस हद दर्जे तक सिर माथे लगाकर अपना हमसफर-हमराज बनाया था, आज उसी ने इसी 18 अक्टूबर को नेहा सिंह राठौर की फोटो लगाते हुए एक ऐसी सर्वथा असत्य खबर प्रसारित कर दी कि जिससे देश एक ही झटके में सन्न रह गया।
खबर चलाई गई थी कि नेहासिंह राठौर वाले
हाॅस्टल में सेक्स रैकेट? पुलिस ने मारा छापा!
उक्त चैनल ने तब तक कम से कम ये तो पता कर ही लिया होगा और बहुत संभव है कि 18 अक्टूबर को नेहा सिंह राठौर ने नवरात्रि-पर्व की महाअष्टमी का व्रत-उपवास भी किया ही होगा ! क्या ABP बता सकता है कि पूजा-पाठ के उन्हीं पवित्र दिनो में ऐसी अपवित्र तथा असत्य खबर का प्रसारित होना, परिजनों, प्रशंसकों और समूचे पत्रकार-जगत के लिए कितना पीड़ादायक तथा त्रासदायक रहा होगा?
इस सनसनीखेज खबर में नेहा सिंह राठौर की बाकायदा फाइल-फोटो सहित पुलिस-छापे का विस्तृत विवरण भी दिया गया था, जो कि नितांत निंदनीय, नितांत शर्मनाक और नितांत असत्य तो था ही, महिलाओं के प्रति घनघोर अपमानजनक व जुगुप्सा जगाने वाला भी था।
नेहासिंह राठौर द्वारा फोन करने पर ABP न्यूज चैनल ने यह कहते हुए संक्षिप्त-क्षमा माँग ली कि उक्त जानकारी तथ्यों के आधार पर गलत पाई गई। इतिश्री?
अभी-अभी दो-तीन बरस पहले ही नेहा सिंह राठौर का विवाह हुआ है। सभी जानते और मानते हैं कि दाम्पत्य-जीवन के प्रारंभिक परीक्षा-काल में इस तरह की प्रायोजित, किन्तु कुंठित खबर के दुष्प्रचार से निकलने वाले दुष्प्रभाव व दुष्परिणाम किस हद तक, कितने प्राणघातक हो सकते हैं?
ABP के प्रमुख कर्ताधर्ता रजनीश आहूजा (पूर्व संचालक अभिजीत सरकार) का ये तौर-तरीका निहायत गैर-जिम्मेदार और गैर-मानवीय साबित हुआ है, जब वे समाचार-पीड़िता नेहा सिंह राठौर को कोई भी सांत्वना-संतोष देने की बजाय, बद्तमीजी दिखाते हुए फोन काट देना पसंद करते हैं?
अगर एक नेशनल चैनल की ओर से, नेहासिंह राठौर जैसी एक सुप्रसिद्ध सम्मानित सृजनशील भोजपुरी लोकगीत गायिका (असंदिग्ध) के साथ ऐसा अमान्य तथा अमानवीय मानसिक-प्रताड़नाभरा र्दुव्यवहार किया जा सकता है, तो अन्य सामान्य नागरिकों की स्थिति क्या होगी?
मानवाधिकार उलँघनो पर निरंतर-चिरंतर
चर्चारत रहने वाले वीर-बालक चुप क्यों हैं?
अभिव्यक्ति की व्यक्तिगत और सार्वजनिक
स्वतंत्रता के शंकराचार्य चुप क्यों हैं?
महिलाओं के आत्मसम्मान को संरक्षण प्रदान करने वाले महिला-मुक्ति के स्वनामधन्य पक्षधर यौद्धा चुप क्यों हैं?
धड़धड़ाते हुए हर कहीं अपनी झोली फैलाकर हाजिरी बजाने वाला दुर्लभ फैशनपरस्त महिला-आयोग चुप क्यों है?
खैर, वे बहुत सारे हैं,जो बहुत सारे अन्याय-विरूद्ध चुप हैं और एक अकेली नेहासिंह राठौर को, कौरव-पांडव सभा में, द्रौपदी-सम अपमानित किया जा रहा है!
सवाल है कि इस समय इस प्रकरण के संदर्भ-समाधान हेतु सक्षमतौर पर क्या किया जा सकता है अथवा क्या किया जाना चाहिए?
महिला-आयोग को चाहिए कि वे ABP के खिलाफ तुरंत पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवाएँ और देशभर में विभिन्न स्तरों पर विरोध-प्रदर्शन भी करें।
ABP न्यूज चैनल का लायसेंस (दिनभर क्षमा-याचना प्रसारण करवाते हुए ) तत्काल प्रभाव से हमेशा-हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाना चाहिए।
पुनश्च:
एबीपी न्यूज चैनल ने संबंधित तीनों पत्रकारों को निकाल दिया है। खबर ये भी है कि मूल रूप से ये विवादास्पद खबर, जिस महिला पत्रकार ने तैयार की थी, वह एक फर्जी वीडियो के झाँसे में आ गई थी।
लेकिन इससे उसका अपराध कम नहीं हो जाता है।वरिष्ठों ने भी या तो खबर को क्राॅस चेक नहीं किया या कि फिर किसी दबाव में आकर, जान-बूझकर, जस का तस जाने दिया।ये नीतिगत सवाल अभी साफ नहीं हुआ है।
कारण जो भी रहे हों या जो भी हो सकते हों, ये महिला-विरोधी अपराध अक्षम्य है। किसी को भी, किसी के भी चरित्र-हनन का अधिकार नहीं है।
वैसे खबर एबीपी के मुख्य चैनल पर नहीं, उसके पोर्टल पर थी। इसके लिए चैनल पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ज्यादातर लोगों को इसका पता तभी चला, जब नेहासिंह राठौर ने सोशल मीडिया पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी।







