भ्रष्टाचार का भंवर।

Spread the love

हरी राम यादव,  बनघुसरा, अयोध्या (उ. प्र.)

भ्रष्टाचार का भंवर।

 

भ्रष्टाचार के भंवर में,

फंसा हुआ है देश।

धरती से आकाश तक,

बचा नहीं है कुछ शेष ।

बचा नहीं है कुछ शेष,

निर्निमेष विस्तार हो रहा।

इसके आतप से परेशान,

मानव क्या पशु भी रो रहा।

धन पशु मानव लगा हुआ,

जल्दी धन करने में अर्जित।

ईमान बेचना, हकमारी करना,

नहीं है इसमें कुछ भी वर्जित।

 

 

  • Related Posts

    न जाने तुम — सुल्तान अली गहलोत

    Spread the love

    Spread the love  सुल्तान अली गहलोत                                                शिक्षक…

    मध्यस्थता

    Spread the love

    Spread the love  बीएल भूरा                                                   …

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    विश्व – ज्योति साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था की काव्य गोष्ठी संपन्न।

    • By User
    • November 2, 2026
    • 14 views
    विश्व – ज्योति साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था की काव्य गोष्ठी संपन्न।

    त्रियुगीनारायण में तीर्थ यात्रियों का आंकड़ा 3.58 लाख के पार

    • By User
    • November 2, 2026
    • 8 views
    त्रियुगीनारायण में तीर्थ यात्रियों का आंकड़ा 3.58 लाख के पार

    फिजिशियन की तैनाती से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती। 

    • By User
    • November 2, 2026
    • 17 views
    फिजिशियन की तैनाती से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती। 

    ‘कर्मफल’ (भाग18)

    • By User
    • November 2, 2026
    • 16 views
    ‘कर्मफल’ (भाग18)

    मैंने अपनी जिंदगी में इतना घटिया IAS ऑफिसर कभी नहीं देखा है भाई?

    • By User
    • November 2, 2026
    • 11 views
    मैंने अपनी जिंदगी में इतना घटिया IAS ऑफिसर कभी नहीं देखा है भाई?

    प्रो. (डॉ.) दिनेश चमोला ‘शैलेश’ के काव्य संग्रह ‘कर्म की पगडंडियां’ पर हुआ राष्ट्रीय व्याख्यान।

    • By User
    • November 2, 2026
    • 15 views
    प्रो. (डॉ.) दिनेश चमोला ‘शैलेश’ के काव्य संग्रह ‘कर्म की पगडंडियां’ पर हुआ राष्ट्रीय व्याख्यान।