एकता और संप्रभुता के लिए संकल्पित पं. दीनदयाल उपाध्याय।

Spread the love

 

डॉ. राघवेंद्र शर्मा

 

 

एकता और संप्रभुता के लिए संकल्पित पं. दीनदयाल उपाध्याय।

 

बहुत कम संगठन ऐसे होते हैं, जो नीति और सिद्धांतों की बुनियाद पर खड़े होते हैं। ऐसे संगठन तो कल्पनातीत ही हैं, जो राष्ट्रीयता की भावना से ओत-प्रोत बने रहते हैं। लेकिन यह भारतीय जनसंघ के रूप में संभव हो पाया तो इसलिए,क्योंकि इस संगठन की नींव रखने वाले हाथ पवित्र और मन जनता जनार्दन की सेवा के लिए संकल्पित बने रहे। भारतीय जन संघ की जिस समय स्थापना हुई, तब उसे लेकर सत्ता पक्ष पर काबिज राजनीतिक दलों और उनके नेताओं की सोच विरोधी विचारधारा वाले दलों के प्रति सकारात्मक तो कतई नहीं थी। जनसंघ के संस्थापक भी यह जानते थे कि फिलहाल सत्ता प्राप्त होना तो दूर, हम जनता जनार्दन का विश्वास भी शायद ही हासिल कर पाएंगे। लेकिन मन में संकल्प था कि हमें देश की सेवा करनी है । उसकी एकता और संप्रभुता के लिए संकल्पित होना है। देर से ही सही, लेकिन इस सपने को पूरा करके भी दिखाना है। ऐसा हुआ भी, जब जन संघ की स्थापना हुई तो उसे मतदान केंद्रों पर तैनात करने के लिए एजेंट तक बड़ी मुश्किल से उपलब्ध हो पाते थे। चुनाव लड़ने के लिए भी गणमान्य लोगों की मान मनौव्वल करना पड़ती थी। लेकिन फिर भी जनसंघ और उसके नेताओं की मनो स्थिति अडिग बनी रही, तो केवल इसलिए क्योंकि उसके संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे त्यागी और तपस्वी नेता थे। जिन्हें हार जीत से ज्यादा वैचारिक आंदोलन की परवाह थी। यह भी सत्य है कि जब पूर्व से पश्चिम तक और उत्तर से दक्षिण तक कांग्रेस तथा उसके मित्र दलों की तूती बोलती थी। तब जन संघ के नेताओं को जमानत बचाने के लिए भी चुनाव में जमीन आसमान एक कर देना पड़ता था। लेकिन फिर भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय और उनके जैसे अनेक संघर्षशील नेताओं की लड़ाई इसलिए जारी रही, क्योंकि पंडित दीनदयाल कहा करते थे। हमारी जीत और हार भारतीय मतदाता द्वारा तय की जाएगी। लेकिन यह हम तय करेंगे कि हमें भारतीय राजनीति में गहरे तक बैठ चुकी तुष्टिकरण की राजनीति का विरोध करना है। हमें जाति संप्रदाय के नाम पर गहरे तक खोद दी गई खाई को हर हाल में पाटने का काम करना है। यदि समय रहते ऐसा ना हुआ तो सत्ता के भूखे राजनीतिक दलों ने जातियों और संप्रदायों के बीच जो गहरी खाई खोद रखी है, वह देश के लिए अनिष्टकारी सिद्ध होने वाली है।

यही कारण है कि दीनदयाल उपाध्याय पूर्णकालिक जनसंघ के होकर विभिन्न राज्यों के प्रवास करते रहे और आम आदमी को जनसंघ से जोड़ते चले गए। उनकी यह सक्रियता सत्ता लोलुप नेताओं को रास नहीं आई। क्योंकि वे समझ चुके थे कि दीनदयाल उपाध्याय की सतत सक्रियता जन संघ को नित्य नई ताकत प्रदान कर रही है। यदि ऐसा ही रहा तो यह दल एक दिन जन आकांक्षाओं के अनुरूप राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा कर देगा। यही कारण रहा कि बेहद रहस्यमई तरीके से पंडित दीनदयाल उपाध्याय मृत्यु का शिकार हुए और एक दिन उनका शव मुगल सराय रेलवे स्टेशन के पास पटरियों के किनारे लावारिस अवस्था में पाया गया। तब धर्मनिरपेक्षता की आड़ में तुष्टिकरण की नीति करने वाले नेताओं को संतुष्टि हुई कि अब जनसंघ की विकास यात्रा को रोका जा सकेगा। लेकिन तब तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय इस संगठन के हर सदस्य के मन मस्तिष्क में राष्ट्र प्रेम का बीज बो चुके थे। उनका गुरु मंत्र था कि हार जीत की चिंता किए बगैर राष्ट्र हित के मद्देनजर सत्ताधारी नेताओं के षडयंत्रों को सार्वजनिक करते रहो। एक न एक दिन जनता जनार्दन जागेगी और वह दिन लोकतांत्रिक इतिहास का नया सवेरा लेकर आएगा। यही हुआ, पंडित दीनदयाल उपाध्याय भले ही सशरीर हमारे बीच ना रहे, लेकिन उनकी प्रेरणा लगातार जन संघ को जनता जनार्दन की सेवा के लिए प्रेरित करती रही। उन्हीं की प्रेरणा से आपातकाल को माध्यम बनाकर लोकतंत्र का गला घोटने वाली सरकार का अंत करने में जनसंघ ने बढ़ चढ़कर भागीदारी निभाई। यहां तक कि देश को एक लोकतांत्रिक सरकार देने के लिए खुद को होम कर दिया। लेकिन जब इस पवित्र लक्ष्य से संकल्पित दल के त्याग को तत्कालीन अवसरवादी राजनेता समझ न पाए तब भारतीय जनसंघ ने भारतीय जनता पार्टी के रूप में स्वयं को नए रूप में प्रकट किया और राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत नए भारत के निर्माण के लिए यात्रा पुनः प्रारंभ कर दी। यह पंडित दीनदयाल उपाध्याय और फिर उनके बाद उनके आदर्श पर चलने वाले नेताओं की मेहनत का ही परिणाम है कि आज भारतीय जनता पार्टी विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन बन चुका है। जिन संकल्पनाओं को लेकर पहले भारतीय जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी का प्रादुर्भाव हुआ, उनमें धारा 370, अयोध्या का राम मंदिर और समान नागरिक कानून के रास्ते पर भाजपा की ईमानदारी स्वत: सिद्ध है। आज जब उनके जन्म के 109 वर्ष पूर्ण होने को हैं, तब उनके सपनों का भारत विश्व का नेतृत्व करने हेतु स्वयं को सान्निध पाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा के राजनीतिक संविधान में ही नहीं बल्कि उसके कार्यकर्ताओं की रग-रग में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्राणवायु और रक्त बनकर हृदय की मानवीय संवेदनाओं को जीवित बनाए हुए हैं।

(विभूति फीचर्स)

  • Related Posts

    संकल्प, साधना और सेवा के प्रेरणा पुञ्ज नरेन्द्र मोदी

    Spread the love

    Spread the love​ विष्णु दत्त शर्मा (लेखक राष्ट्रीय संयोजक, प्रकोष्ठ संकुल भाजपा एवं खजुराहो लोकसभा से सांसद हैं।)                     नया अध्याय,…

    नरेंद्र मोदी जी केवल प्रधानमंत्री ही नहीं, सेवा और साधना में रत एक व्यक्तित्व

    Spread the love

    Spread the love    लेखिका: सुश्री सरोज कंसारी (कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका) रिपोर्टर एवं उद्घोषिका नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)                       (नया…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    अल्मोड़ा में मां नंदादेवी मेले का विधिवत शुभारंभ, दीप प्रज्वलन से हुआ आगाज।

    • By User
    • September 16, 2026
    • 6 views
    अल्मोड़ा में मां नंदादेवी मेले का विधिवत शुभारंभ, दीप प्रज्वलन से हुआ आगाज।

    विधिक सेवा के अध्यक्ष श्रीकांत पांडे के तत्वाधान में जागरूकता शिविर का‌ आयोजन।

    • By User
    • September 16, 2026
    • 11 views
    विधिक सेवा के अध्यक्ष श्रीकांत पांडे के तत्वाधान में जागरूकता शिविर का‌ आयोजन।

    अल्मोड़ा पुलिस के महिला कोतवाली, थाना धौलछीना एवं थाना सल्ट ने चलाया जनजागरूकता अभियान।

    • By User
    • September 16, 2026
    • 6 views
    अल्मोड़ा पुलिस के महिला कोतवाली, थाना धौलछीना एवं थाना सल्ट ने चलाया जनजागरूकता अभियान।

    संकल्प, साधना और सेवा के प्रेरणा पुञ्ज नरेन्द्र मोदी

    • By User
    • September 16, 2026
    • 11 views
    संकल्प, साधना और सेवा के प्रेरणा पुञ्ज नरेन्द्र मोदी

    नरेंद्र मोदी जी केवल प्रधानमंत्री ही नहीं, सेवा और साधना में रत एक व्यक्तित्व

    • By User
    • September 16, 2026
    • 11 views
    नरेंद्र मोदी जी केवल प्रधानमंत्री ही नहीं, सेवा और साधना में रत एक व्यक्तित्व

    दस सूत्रीय मांगों को लेकर प्रधान संगठन ने ब्लॉक मुख्यालय पर की तालाबंदी। 

    • By User
    • September 16, 2026
    • 11 views
    दस सूत्रीय मांगों को लेकर प्रधान संगठन ने ब्लॉक मुख्यालय पर की तालाबंदी।