संजय सोंधी
(संयुक्त सचिव)
भूमि एवं भवन विभाग
दिल्ली सरकार
प्लास्टिक से पकवान: अंबिकापुर का अनोखा ‘कचरा कैफे’
छत्तीसगढ़ः के अंबिकापुर शहर ने 2019 में एक अनूठी पहल शुरू की, जिसे कचरा कैफे का नाम दिया गया। इस अभिनव योजना का उद्देश्य प्लास्टिक प्रदूषण और भुखमरी को एक साथ खत्म करना है। इस योजना के तहत, 1 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा जमा करने पर भरपेट भोजन मिलता है, जिसमें चावल, दाल, दो तरह की सब्ज़ी, रोटी, सलाद और अचार शामिल है। अगर कोई आधा किलोग्राम प्लास्टिक कचरा लाता है, तो उसे नाश्ता, जैसे समोसा या वड़ा पाव दिया जाता है।
यह योजना स्वच्छ भारत मिशन का हिस्सा है और इसे नगर निगम द्वारा चलाया जाता है। इसकी सफलता इतनी बड़ी थी कि 2025 तक इसे अंबिकापुर जिले के रुपकार गांव में भी शुरू किया गया, जो ग्रामीण क्षेत्र का पहला कचरा कैफे बन गया। यहां इकट्ठा हुए प्लास्टिक को रीसाइक्लिंग इकाई में ग्रैन्यूल में बदल दिया जाता है, जिसका उपयोग सड़क बनाने के लिए होता है।
इस पहल का असर कई स्तरों पर दिखाई देता है। पर्यावरण के लिए यह बहुत फायदेमंद है, क्योंकि यह प्लास्टिक को लैंडफिल में जाने से रोकता है, जिससे मिट्टी और पानी का प्रदूषण कम होता है। सामाजिक स्तर पर, यह उन बेघर और गरीब लोगों को पौष्टिक भोजन देता है जो कूड़ा बीनकर अपना गुजारा करते हैं, जिससे कुपोषण में कमी आती है। आर्थिक रूप से, नगर निगम को इस कचरे से हर महीने करीब 12 लाख रुपये की कमाई होती है, जो रीसाइक्लिंग से आती है।
इस योजना के सकारात्मक परिणाम बहुत प्रभावशाली हैं। 2019 से 2024 के बीच, शहर का प्लास्टिक कचरा 66 टन कम हुआ। रोज़ लगभग 20-30 लोग इस कैफे में खाना खाते हैं, जिससे भुखमरी की समस्या घटी है। इस सफलता में 480 ‘स्वच्छता दीदियां’ का बड़ा योगदान है, जो घर-घर जाकर 60 श्रेणियों में कचरा अलग करती हैं। इन प्रयासों से अंबिकापुर पूरी तरह से जीरो-लैंडफिल शहर बन गया है, और एक 16 एकड़ का पुराना डंपिंग ग्राउंड अब खूबसूरत पार्क में बदल गया है।
अंबिकापुर को स्वच्छ भारत सर्वेक्षण 2024-25 में भारत का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर और 1-3 लाख जनसंख्या वाली श्रेणी में पहला स्थान मिला है। यह अभिनव कचरा कैफे योजना न केवल अंबिकापुर की सफलता का एक बड़ा हिस्सा है, बल्कि यह देश के दूसरे शहरों, जैसे सिलीगुड़ी और हैदराबाद, के लिए भी प्रेरणा बन रही है।







