सरोज कंसारी
कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका
नवापारा-राजिम
रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, देहरादून)
आलेख:
प्रेम, समझ और रूहानी एकता का अनंत बंधन!
-सुश्री सरोज कंसारी।
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“खामोशी हमें अंधकार में ले जाती हैं, जबकि हँसी और गीत हमें प्रकाश की ओर ले जाते हैं।”
जीवन एक यात्रा है…मंज़िल नहीं! इस अविरल जीवन-यात्रा में, नकारात्मकता को छोड़कर सकारात्मकता को अपनाना चाहिए, और हँसते-गाते जीवन को उत्सव की तरह मनाना चाहिए। जीवन की यात्रा में, नाराज़गी और ख़ामोशी दो ऐसे पत्थर हैं जो हमारी प्रगति को रोक सकते हैं। परन्तु, हमको इन पत्थरों को हटाकर, आगे बढ़ना होगा…हँसते और गाते हुए जीवन को बिताना है। नाराज़गी हमें अंधकार में ले जाती है, जबकि हँसी और गीत हमें प्रकाश की ओर ले जाते हैं। ख़ामोशी हमें अलग-थलग कर देती है, जबकि साझा किए गए अनुभव हमें जोड़ते हैं। चलें, नाराज़गी और ख़ामोशी को छोड़कर जीवन को उत्सव की तरह मनाएं। हँसते और गाते हुए, हम ये ज़िन्दगी की…सच्ची खुशी पा सकते हैं।
ईश्वरीय प्रेम को समझे बिना जीवन में आत्मिक शक्ति प्राप्त करना संभव नहीं है। ईश्वरीय आशीर्वाद पवित्र आत्मा के साथ सदा ही होता है। भक्ति पूर्ण प्रेम की गहराई में ही जीवन की सच्चाई नजर आती है। संसारिक प्रेम हमें मोह में जकड़कर भ्रमित करता है और अनंत यातनाओं से भर देता है, तब हम मुक्ति के लिए ईश्वर की शरण में ही आते हैं।
प्रत्येक इंसान प्रेम को अपनी परिस्थिति के अनुसार समझता और महसूस करता है। प्रेम का एक ऐसा ही रूप जो दिव्य है, स्वयं में सर्व शक्ति है, जो भावनाओं में सतत प्रवाहित होकर हमें असीम शांति प्रदान करता है, जिसे रूहानी प्रेम कहते हैं। रूहानी प्रेम में अलौकिक सुख का समंदर होता है, जहां डूबने से हर दुख धूल जाता है, जहां आंतरिक सुकून की प्राप्ति होती है। प्रेम रूहानी हो तो जीवन स्वयं स्वर्ग बन जाता है, शुद्ध, सात्विक, निस्वार्थ प्रेम से ही हम शोक-संताप से मुक्त रह सकते हैं…। रूहानी प्रेम सांसारिक जीवन की व्याकुलता से परे होता है, जहां आत्म-ज्ञान, समर्पण, त्याग, निस्वार्थ कर्म की प्रमुखता होती है। निज की स्वार्थ से परे एक दिव्य प्रेम जो आत्मिक सुख का आधार होता है, एक ऐसा अटूट प्रेम का बंधन जिसे दुनिया की कोई शक्ति नहीं तोड़ सकती।
ईश्वर से नाता जब दिल से जुड़ जाता है, तो हर क्लेश दूर हो जाता है। सच्चे प्रेम का संबंध सीधे भावनाओं से होता है। हृदय में जब पवित्र भाव आ जाते हैं, दुर्भाव का अंत होता है, तो हम ईश्वर का आशीर्वाद पाते हैं।…रूहानी प्रेम आत्मिक एहसास है, पाने और खोने का कोई डर नहीं होता क्योंकि रूह में जो प्रेम उतर जाता है, वो कभी किसी के लिए, किसी परिस्थिति में कम नहीं होता। रूहानी प्रेम की इस यात्रा में, हमें अपने दिल को खोलने और ईश्वरीय प्रेम को अपनाने की आवश्यकता है। आने वाले वक़्त में, हम इस रूहानी प्रेम को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें और अपने आसपास के लोगों को भी प्रेरित करें।…जीवन की राह में, नाराज़गी व ख़ामोशी पत्थर बन जाते हैं,परन्तु हमको इन पत्थरों को हटाकर, आगे बढ़ना होगा हँसते गाते। नाराज़गी ले जाती अंधकार में, हँसी और गीत प्रकाश दिखाते,ख़ामोशी अलग करती, साझा अनुभव हमें जोड़ते हैं साथ में आते। चलें, नाराज़गी व ख़ामोशी को छोड़कर जीवन को उत्सव मनाएं, हँसते गाते, सच्ची खुशी पाएं।
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