राजेन्द्र रंजन गायकवाड़
(सेवानिवृत्त जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
यादगार सफर
(सेवा निवृत्ति का)
आज एक ऐसा दिन है जब एक समर्पित सेवा-यात्री ने अपना औपचारिक दायित्व पूरा कर लिया हूं। केंद्रीय जेल अधीक्षक के पद से सफलतापूर्वक चार वर्ष पूर्ण कर सम्पूर्ण संतुष्टि प्राप्त की लेकिन यह निवृत्ति मात्र पद की समाप्ति नहीं, बल्कि एक नई ऊर्जा और व्यापक सामाजिक- साहित्यिक योगदान की शुरुआत है। इन चार वर्षों में उन्होंने न केवल घर को कुशलतापूर्वक संभाला, बल्कि साहित्य, समाज-सेवा और प्रेरणा के क्षेत्र में भी अमिट छाप छोड़ कर साहित्यिक के क्षेत्र में आठ किताबों में विगत चार वर्ष में, चार अनमोल कृतियों से मेरी नई पहचान बनी है ।
विगत चार वर्षों की सेवा अवधि को यादगार बनाने वाली सबसे बड़ी उपलब्धि रही मेरी नई चार पुस्तकों का प्रकाशन जो आदर्श समाज स्वप्न साकार संस्था के माध्यम से हुआ है। प्रकाशित पुस्तकें हैं रागरंजन, परिवर्तक, आकाश पथ और प्रेम पच्चीसा,,,
रागरंजन सकारात्मक लेख भावुकता की अनुभूतियों को रंगीन शब्दों में बुनती है।
परिवर्तक जेल अधीक्षक की आत्म कथा मेरे जीवन और अनुभव के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा देती है।
आकाश पथ सपनों को उड़ान देने वाली महत्वाकांक्षा और प्रेम भरी कविताएं हैं।
श्री प्रेम पच्चीसा प्रेम से समाज की समस्याओं को सुलझाने का मार्गदर्शी एक लोकप्रिय उपन्यास है।
मित्रों मेरी सभी आठ पुस्तकें मात्र कागज पर छपी शब्द-मालाएँ नहीं, बल्कि उनके जीवन-दर्शन, जेल अनुभवों, मानवीय संवेदनाओं और समाज-परिवर्तन की सोच का प्रतिबिंब हैं।
इसके साथ ही 19 वर्षों का अटूट सामाजिक संकल्प आदर्श समाज स्वप्न साकार संस्था वर्षों से निरंतर समाज-सेवा के क्षेत्र में सक्रिय है। शिक्षा, स्वास्थ्य, साहित्य और समग्र सामाजिक उत्थान के अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से संस्था ने हजारों लोगों के जीवन को छुआ है। जेल सुधार, कैदियों के पुनर्वास, बाल शिक्षा, स्वास्थ्य शिविर, साहित्यिक कार्यशालाएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम ये सभी संस्था के कार्यों का अभिन्न अंग रहे हैं।
सेवा निवृत्ति के इन चार वर्षों की यात्रा में जो सबसे बड़ी खुशी मिली, वह है समाज की सेवा करते हुए लोगों के चेहरों पर आए सकारात्मक बदलाव को देखना। संस्था के माध्यम से 19 सालों में यह साबित किया कि सेवा और सृजन एक-दूसरे के पूरक हैं।
डिजिटल दुनिया में साहित्यिक लोकप्रियता
आज की डिजिटल युग में उनकी रचनात्मकता ने सोशल मीडिया पर भी धूम मचाई है।
फेसबुक पर तीन लाख से अधिक अनुयायी (दर्शक) मेरी रचनाओं और विचारों से जुड़े हुए हैं।
मुझे खुशी है कि Your Quotes प्लेटफॉर्म पर आज पूरे 3600 रचनाएँ पूर्ण हुईं एक अभूतपूर्व उपलब्धि जो निरंतर सृजनशीलता का प्रतीक है। इसके साथ ही प्रतिलिपि, इंस्टाग्राम और X (पूर्व ट्विटर) पर प्राप्त लाइक्स, शेयर और कमेंट्स ने न केवल उनकी लोकप्रियता बढ़ाई, बल्कि हजारों पाठकों में पढ़ने-लिखने की रुचि जगाई। ये आँकड़े मात्र संख्या नहीं, बल्कि साहित्य के प्रति उनके समर्पण और पाठकों के विश्वास का प्रमाण हैं।
ऑनलाइन चर्चाओं का सार्थक मंच
शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हुए वे रात 11 बजे तक Zoom और Google Meet पर ऑनलाइन सत्रों में भाग लेते हैं। इन चर्चाओं में वे अपने जेल अनुभव, जीवन-दर्शन, समाज-सुधार और साहित्यिक अंतर्दृष्टि साझा करते हैं।
युवा लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पाठकों के साथ इन संवादों ने कई लोगों को प्रेरित किया है। उनकी बातों में अनुभव की गहराई, विचारों की स्पष्टता और मानवीय संवेदना स्पष्ट झलकती है। संदेश और भविष्य निवृत्ति के इस अवसर पर उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची सेवा कभी रुकती नहीं। पद से निवृत्ति हुई है, लेकिन संकल्प, सृजन और समाज-सेवा की यात्रा अब और अधिक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगी। आदर्श समाज स्वप्न साकार संस्था के माध्यम से वे और भी बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए तैयार हैं, अधिक पुस्तकें, अधिक कार्यशालाएँ, अधिक युवाओं को प्रेरित करना और समाज को बेहतर बनाने का निरंतर प्रयास।
एक प्रेरणादायक जीवन का सार है कि
“सेवा करो, सृजन करो, और प्रेम बाँटो यही जीवन का सच्चा आकाश पथ है, परिवर्तक का
इस शानदार यात्रा के लिए हार्दिक बधाई! आपके अनुभव, रचनाएँ और संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे। आदर्श समाज स्वप्न साकार संस्था सेवा, साहित्य और समर्पण की अमर गाथा
यह आलेख आपकी उपलब्धियों को पूरी गरिमा और भावपूर्ण विस्तार के साथ प्रस्तुत करती है।
उक्त सभी सफलताओं के लिए आप सब का हृदय से आभारी हूं।







