संवाददाता कन्नौज (उ.प्र.): दीप सिंह
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
किसानों की आय बढ़ाने को प्राकृतिक खेती और श्रीअन्न को दें बढ़ावा : डीएम
कन्नौज: किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने और मृदा एवं जल संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाए। सभी कृषि योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाए। यह निर्देश जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट के गांधी सभागार में आयोजित कृषि योजनाओं की संयुक्त समीक्षा बैठक में दिए।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आत्मा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयलसीड्स, उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग सहित भूमि एवं जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति और कार्ययोजना की समीक्षा की गई।
उप कृषि निदेशक संतोष कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत संकर मक्का, बाजरा, ज्वार और जौ के क्लस्टर प्रदर्शन, गुणवत्तायुक्त बीज वितरण, कृषक प्रशिक्षण, किसान मेला, एक्सपोजर विजिट और मिलेट प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना की जाएगी। पात्र किसानों को निर्धारित मानकों के अनुसार अनुदान भी दिया जाएगा।
बैठक में तिल, राई, मूंगफली और सूरजमुखी जैसी तिलहनी फसलों को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर प्रदर्शन, प्रशिक्षण और तिलहन मेले की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। साथ ही श्रीअन्न (मिलेट्स) की खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।
500 हेक्टेयर में होगी प्राकृतिक खेती
नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत कन्नौज और उमर्दा विकासखंडों में 500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में क्लस्टर आधारित प्राकृतिक खेती कराई जाएगी। चयनित किसानों को प्रशिक्षण, क्षमता विकास, एक्सपोजर विजिट, उत्पाद प्रमाणन और डीबीटी के माध्यम से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। नमामि गंगे और गंगा तटवर्ती क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
कम पानी वाली फसलों को दें बढ़ावा
डीएम ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान समय की बड़ी आवश्यकता है। किसानों को कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए श्रीअन्न सहित वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि भूजल संरक्षण के साथ किसानों की आय भी बढ़ाई जा सके।
उन्होंने जिला भूमि एवं जल संरक्षण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए अमोलर राजकीय क्षेत्र में ऊसर भूमि सुधार, वर्षा जल संचयन के लिए तालाब निर्माण, मृदा एवं जल संरक्षण, भूमि विकास, उपयुक्त फसल प्रणाली तथा जल निकास नालों के पुनर्जीवन के कार्य निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र कुमार श्रीवास, जिला कृषि अधिकारी संतलाल गुप्ता सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।






