सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी
(नया अध्याय, देहरादून)

तुंगनाथ घाटी के ताला तोक में लगातार भूस्खलन।
दो दर्जन से अधिक परिवारों पर मंडराया संकट।
आकाश कामिनी नदी के तीव्र कटाव से बढ़ा खतरा। कुण्ड–चोपता राष्ट्रीय राजमार्ग भी आ सकता है भूस्खलन की जद में।
ऊखीमठः विश्व प्रसिद्ध तुंगनाथ घाटी के ताला तोक क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से जारी भूस्खलन अब गंभीर रूप धारण करता जा रहा है। लगातार हो रहे भू-धंसाव और आकाश कामिनी नदी के तीव्र कटाव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। स्थिति यह है कि दो दर्जन से अधिक परिवारों के मकानों और कृषि भूमि पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, जबकि कुण्ड–चोपता राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा भी खतरे की जद में आता दिखाई दे रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रत्येक वर्ष बरसात के दौरान आकाश कामिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी का कटाव तेज हो जाता है। इससे पहाड़ी का आधार लगातार कमजोर होता जा रहा है और भूमि का खिसकना जारी है। इस वर्ष लगातार हो रही वर्षा के कारण भूस्खलन की रफ्तार और बढ़ गई है, जिससे लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
जानकारी देते हुए प्रधान प्रतिपाल बजवाल ने बताया कि ताला तोक में कई स्थानों पर भूमि में चौड़ी दरारें उभर आई हैं। खेतों का बड़ा हिस्सा धंस चुका है । यदि शीघ्र स्थायी सुरक्षा कार्य नहीं किए गए तो आने वाले समय में आवासीय भवनों के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है।
ग्रामीण महिपाल बजवाल ने बताया कि सबसे बड़ी चिंता कुण्ड–चोपता राष्ट्रीय राजमार्ग को लेकर है। यह मार्ग तुंगनाथ धाम, चोपता तथा आसपास के पर्यटन क्षेत्रों की जीवनरेखा माना जाता है। यदि भूस्खलन और नदी कटाव की स्थिति इसी प्रकार बनी रही तो राजमार्ग का हिस्सा भी प्रभावित हो सकता है, जिससे स्थानीय जनजीवन, पर्यटन गतिविधियों और चारधाम यात्रा से जुड़े आवागमन पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
उन्होंने भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने, नदी तट पर सुरक्षात्मक कार्य (फ्लड प्रोटेक्शन एवं तटबंध निर्माण) कराने तथा खतरे की जद में आए परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास की मांग दोहराई है। वहीं दूसरी ओर आपदा विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में अनियोजित कटान, अत्यधिक वर्षा और नदियों के तीव्र कटाव के कारण भू-स्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते भू-वैज्ञानिक अध्ययन, ढलानों का स्थिरीकरण और नदी प्रशिक्षण कार्य कराना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी जनहानि और आर्थिक क्षति को रोका जा सके। पूर्व प्रधान प्रदीप बजवाल ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि ताला तोक को आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील घोषित कर तत्काल स्थायी सुरक्षा योजना बनाई जाए। साथ ही प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, राष्ट्रीय राजमार्ग की निगरानी बढ़ाने तथा आकाश कामिनी नदी के कटाव को रोकने के लिए युद्धस्तर पर सुरक्षात्मक कार्य प्रारंभ किए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आगामी बरसात में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों का कहना है कि भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र की निगरानी की जा रही है तथा राजमार्ग के जिन हिस्सों में दरारें पड़ी थी उनका स्थाई ट्रीटमेंट किया गया है।









