अदिती कुशवाहा
बैकुण्ठपुर (कोरिया) छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
“क्या छत्तीसगढ़ की बेटिया सुरक्षित हैं”।
मैं छत्तीसगढ़ की एक साधारण परिवार से आती हूँ। मैं कोई नेता नहीं हूँ। मैं बस उन लाखों लड़कियों में से एक हूँ, जो रोज घर से निकलकर कॉलेज जाती हैं, अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करती हैं।
लेकिन आज मैं एक डर के साथ जी रही हूँ — क्या मैं सच में सुरक्षित हूँ?
हाल ही में मैंने समाचार पत्र में पढ़ा कि हमारे ही राज्य की विधानसभा में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में 3096, वर्ष 2025 में 3070, और वर्ष 2026 के केवल पहले 6 महीनों में ही 1550 दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए हैं। ये आँकड़े किसी आम व्यक्ति के नहीं, बल्कि सरकार द्वारा सदन में दिए गए आधिकारिक आँकड़े हैं।
एक छात्रा होने के नाते, ये आंकड़े मुझे अंदर तक हिला देते हैं। जब मैं रोज़ घर से कॉलेज जाती हूँ या शाम को घर लौटती हूँ, तो मन में एक सवाल बार-बार आता है — क्या मैं सुरक्षित हूँ?
मैं किसी पर आरोप नहीं लगा रही हूँ, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक और छात्रा के रूप में कुछ सवाल पूछना चाहती हूँ।
छत्तीसगढ़ में 33 जिले हैं, लेकिन महिला थानों की संख्या केवल 13 है। अगर किसी लड़की के साथ रात में कोई घटना हो जाती है, तो वह तुरंत कहाँ जाए? उसे किस पर भरोसा करना चाहिए?
मेरी सरकार और प्रशासन से विनम्र अपील है कि हर जिले में महिला थाना स्थापित किया जाए, ताकि हर बेटी को यह भरोसा मिल सके कि संकट की स्थिति में मदद उसके पास ही उपलब्ध है। साथ ही, 181 महिला हेल्पलाइन जैसी सेवाओं की जानकारी हर कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों पर स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए।
हम लड़कियाँ किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रही हैं। हम सिर्फ इतना चाहती हैं कि हमें भी बिना डर के पढ़ने और आगे बढ़ने का अधिकार मिले।
आज मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि हर उस बेटी के लिए सवाल पूछ रही हूँ, जो चुप है लेकिन अंदर से डरी हुई है ऐसे भयानक घटनाओं से।
अपराध के मामले हर वर्ष बढ़ते जा रहे हैं, पर क्यों?
इसका कारण क्या है? क्यों हर बार इस विषय पर केवल चर्चा करके मौन हो जाते हैं ।
ये केवल एक गणना नहीं, बल्कि कई मासूम जिन्दगीयो को छिनने का कारण है,
जिसे चाह कर भी उनके परिवारों को लौटाया नहीं जा सकता ।
भारत देश तो स्वतंत्र हो गया। पर हम कब स्वतंत्र होंगे?







