राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
शुभ-लाभ
(कहानी)
रवि शर्मा आईटी कंपनी में मिड-लेवल पे स्केल का मैनेजर था। नोएडा के एक सोसाइटी में दो बीएचके फ्लैट, पत्नी प्रिया स्कूल टीचर, बेटा आरव क्लास 8 में पढ़ता था। हर दिवाली रवि खुद लाल पेंट से दरवाजे पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखता—शुभ + लाभ
ऊपर स्वस्तिक, नीचे दीया की आकृति,,
पड़ोसी तालियाँ बजाते, “रवि भाई, बहुत शुभ!” रवि मुस्कुराता, “भाई, घर में इस साल लक्ष्मी आएगी! देखते जाओ,,
लेकिन घर के अंदर हालात अलग थे।
सुबह ऑफिस जाते समय रवि पत्नी से झगड़ता तुम बजट नहीं संभाल पाती हो।
शाम को आरव को डाँटता और कभी कभी पीट भी देता “मोबाइल छोड़ो, वरना फेल हो जाओगे। साथ ही बड़ी होशियारी से कंपनी में जूनियर्स की क्रेडिट को चुरा लेता और बॉस के आगे झूठी रिपोर्ट देकर तरक्की पाता। वीकेंड पर दोस्तों के साथ शराब पीकर घर आता और प्रिया पर चिल्लाता, दरवाजे पर ‘शुभ-लाभ’ चमकता पर घर के अंदर सिर्फ तनाव और शिकायतें हरी भरी थीं।
एक दिन कंपनी में प्रोजेक्ट फेल हो गया। रवि ने गलती जूनियर लड़के पर डाल दी,लड़का नौकरी से निकाल दिया गया। उसी शाम रवि घर पहुँचा तो दरवाज़े पर ‘शुभ-लाभ’ देखकर मुस्कुराया “आज भी लक्ष्मी आएगी।”
लेकिन लक्ष्मी नहीं आई, आया था कॉल उस जूनियर लड़के की माँ का कि मेरा बेटा डिप्रेशन में चला गया है,, रवि ने फोन काट दिया।
रात को आरव ने पूछा, “पापा, दरवाजे पर शुभ-लाभ क्यों लिखते हो? रवि ने गर्व से कहा, “ताकि घर में अच्छी चीज़ें आएँ।”
आरव बोला, “लेकिन आप तो हर दिन गुस्सा करते हो, झूठ बोलते हो… तो शुभ कहाँ से आएगा? अभी आपने किसी का फोन गुस्से में क्यों काटा ?
रवि चुप रह गया, अगली सुबह उसने कुछ अलग किया। दरवाजे से ‘शुभ-लाभ’ मिटा दिया, और मन ही मन तीन फैसले लिए पहला
ऑफिस में उस जूनियर को वापस बुलवाया और अपनी गलती कबूल की। दूसरा ऑफिस से घर आकर प्रिया से माफी माँगी और बजट साथ मिलकर बनाया। तीसरा आरव के साथ रोज आधा घंटा बैठकर बात करता फोन बंद करके।
एक महीने बाद पड़ोसी ने पूछा, “रवि भाई, शुभ-लाभ क्यों मिटा दिया?” रवि मुस्कुराया, “भाई, दीवार पर लिखने से कुछ नहीं होता। अंदर की दीवारें साफ करनी पड़ती हैं। अब घर में शोर और झगड़े कम थे।आरव स्कूल में अच्छा कर रहा था।
प्रिया मुस्कुराती थी दिवाली आई।
रवि ने दरवाजे पर कुछ नहीं लिखा।
सिर्फ एक छोटा सा नोट चस्पा किया,,
“शुभ -विचार और सद्कार्य”
बाकी अपने आप आ जाएगा।”
पड़ोसी हैरान थे। लेकिन रवि के घर से हँसी की आवाज आ रही थी और इस बार सच में… लक्ष्मी (धन), सरस्वती (शिक्षा) ब्रांड की फुलझड़ियां फूट रहीं थीं।







