रामपुर से भावुक क्षणों में विदा होकर सीतापुर पहुंची भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा।

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सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी

 

 

  •                 (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

 

रामपुर से भावुक क्षणों में विदा होकर सीतापुर पहुंची भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा।

 

त्रियुगीनारायण और गौरीकुंड के तीर्थों का करेगी भ्रमण; 

 

15 सितम्बर को केदारनाथ धाम पहुंचेगी दिवारा यात्रा । 

 

         

 

         ऊखीमठः पर्वतराज हिमालय के आंचल से प्रवाहित होने वाली पतित पावनी सरस्वती नदी के किनारे तपस्यारत भगवती कालीमाई की द्वितीय चरण की दिवारा यात्रा इन दिनों केदारघाटी के गांवों में श्रद्धा, आस्था और लोकविश्वास की अलख जगा रही है। शुक्रवार को रामपुर गांव में श्रद्धालुओं को दर्शन एवं आशीर्वाद देने के बाद दिवारा यात्रा भावुक क्षणों के बीच विदा हुई और दो रात्रि प्रवास के लिए सीतापुर पहुंची। मां की डोली के गांव से विदा होने के क्षणों में माहौल भक्तिमय हो उठा। ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा एवं जयकारों के साथ मां को भावपूर्ण विदाई दी। दिवारा यात्रा के सीतापुर पहुंचने पर ग्रामीणों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवती कालीमाई का स्वागत किया। मां की डोली के दर्शन के लिए देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। स्थानीय ग्रामीणों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। सीतापुर में दो रात्रि प्रवास के दौरान विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मां का आशीर्वाद लेंगे।

 

द्वितीय चरण की इस दिवारा यात्रा का अगला पड़ाव केदारनाथ घाटी के उन पवित्र तीर्थस्थलों में होगा, जिनका संबंध भगवान शिव और भगवती गौरा की पौराणिक कथाओं से जुड़ा है। यात्रा त्रियुगीनारायण पहुंचेगी, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह स्थल के रूप में विशेष धार्मिक मान्यता प्राप्त है। यहां मां की पूजा-अर्चना और दर्शन के साथ श्रद्धालु पौराणिक स्मृतियों से जुड़े तीर्थ का पुण्य अर्जित करेंगे। इसके बाद दिवारा यात्रा भगवती गौरा की तपस्थली माने जाने वाले गौरीकुंड पहुंचेगी। त्रियुगीनारायण और गौरीकुंड के धार्मिक स्थलों का भ्रमण करने के बाद दिवारा यात्रा केदारनाथ धाम की ओर प्रस्थान करेगी। आगामी 15 सितम्बर को भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा केदारनाथ धाम पहुंचेगी, जहां लंबे अंतराल के बाद होने वाला मां कालीमाई और भगवान बाबा केदार का मिलन आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा।

 

15 साल बाद मिलन के साक्षी बनेगे हजारों श्रद्धालु

 

दिवारा यात्रा समिति अध्यक्ष लखपत राणा ने बताया कि भगवती कालीमाई और बाबा केदार का यह मिलन करीब 15 वर्षों बाद होने जा रहा है। इसलिए इस ऐतिहासिक क्षण को लेकर केदारघाटी सहित दूर-दराज के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है। धार्मिक मान्यताओं में देव डोलियों के पारस्परिक मिलन को अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। ऐसे में कालीमाई और बाबा केदार के मिलन को देखने के लिए हजारों श्रद्धालुओं के केदारनाथ पहुंचने की संभावना है। दिवाला समिति महामंत्री सुरेशानन्द गौड़ ने बताया कि दिवारा यात्रा के दौरान मां की डोली जिन-जिन गांवों और तीर्थस्थलों से होकर गुजर रही है, वहां लोक परंपराओं, देव आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। दिवारा यात्रा प्रभारी प्रकाश पुरोहित ने बताया कि ग्रामीण अपने आराध्य देवी-देवताओं के साथ मां कालीमाई का स्वागत कर क्षेत्र की सुख-शांति की कामना कर रहे हैं। यात्रा के साथ चल रहे श्रद्धालुओं के लिए यह केवल तीर्थ भ्रमण नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोक आस्था और परंपराओं को जीवंत रूप में अनुभव करने का अवसर भी बन रहा है।

 

केदारनाथ धाम में 15 सितम्बर को होने वाले ऐतिहासिक मिलन को लेकर यात्रा से जुड़े ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने तैयारियां तेज कर दी हैं। माना जा रहा है कि कालीमाई और बाबा केदार के मिलन का वह क्षण केदारघाटी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्मृतियों में लंबे समय तक अंकित रहेगा।

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