प्रभारी सम्पादकः दिनेश शास्त्री
(नया अध्याय, देहरादून)
// पुण्यतिथि पर सादर स्मरण//
महाकवि देवराज दिनेश का ओजस्वी स्वर स्मृति पटल पर अंकित है _ डा. अतुल शर्मा
हिन्दी के वरिष्ठतम कवि व रेडियो नाटकों के लिए प्रसिद्ध देवराज दिनेश जी की पुण्यतिथि है आज।
उन्हें हम दिनेश चाचा जी कहा करते थे। वे हमारे पिताजी स्वाधीनता संग्राम सेनानी एवं राष्ट्रीय कवि श्रीराम शर्मा प्रेम जी के घनिष्ठ मित्र थे। वे पिताजी को दादा कहते थे। चाची जी श्रीमती उर्मिल सब्बरवाल से भी हमे बहुत स्नेह आशीष मिला है।
मेरे जन्म से पहले से वे हमारे घर आते रहे।
उसके बाद हम सभी मालवीय नगर स्थित( दिल्ली) उनके घर जाते। किरण दी राजीव, टीटू और सौरभ पारिवारिकता बनी रही।
देश के तमाम बड़े मंचों पर उनकी कविताएँ गूंजती। दर्शक श्रोता खूब फरमाइश करते। उनके नाम से जनसैलाब उमड़ता।
उनकी ओजस्वी कविता “भारत मां की लोरी” और जीवन और जवानी बहुत प्रसिद्ध रही। और भी बहुत सी कविताओं में रावण से इंटरव्यू अद्भुत रही।
कवि देवराज दिनेश और श्रीराम शर्मा प्रेम देश के प्रसिद्ध लालकिला कवि सम्मेलन दिल्ली में निरंतर उपस्थित रहते।
दिनेश चाचा जी का परिवार हमारे सुभाष रोड स्थित मकान में आते,, गर्मियों की छुट्टी में। बच्चों की ताई जी यानी हमारी अम्मा जी और रेखा रंजना रीता दी खूब अपने पन से रहते।
कल ही किरण दी ने उनका एक विडियो भेजा। दिल्ली के काव्य मंच का।
उसे देख सुन कर हम पुरानी यादों में खो गये।
मेरठ में हुए कवि सम्मेलन का दुर्लभ चित्र है हमारे पास जिसमें महाप्राण निराला और पिताजी का चित्र भी है।
वे हरिकृष्ण प्रेमी, पांडेय बेचन शर्मा उग्र दिनकर जी, सोहन लाल द्विवेदी आदि के समकालीन रहे हैं।
उनकी पुण्य स्मृति को सादर नमन।
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वाणी विहार, जैन प्लाट, देहरादून









