सुश्री सरोज कंसारी
(कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका)
रिपोर्टर एवं उद्घोषिका
नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
सीधे और स्पष्ट बने रहो : सुश्री सरोज कंसारी
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आज जीवन का हर पल किसी न किसी बात पर तनाव-असमंजस और समस्याओं से भरा है। लोगों की नीयत, कार्य-व्यवहार और सोच को समझ पाना कठिन है। सांसारिक जीवन की यात्रा में हमें हर क्षण नए अनुभव होते हैं। अंदाजा लगाना मुश्किल है कि दुनिया की इस भीड़ में कौन अपने हैं या पराए? मोह का जाल चारों तरफ फैला है, हम जकड़े हुए हैं, इस सांसारिक जीवन में धन-दौलत, सुख-सुविधा पाने के लिए। जीवन का हर पल बोझिल है, हम नहीं जानते इस सफर का अंत कब, कहां और कैसे हो? इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं। जीवन की दुविधाओं के बीच आज हर मन सुकून की चाह में भटक रहा है। दिखावटी दुनिया में मन की शांति बनाए रखना वाकई कठिन काम है। अंतर्मन की पीड़ा को आज हम व्यक्त करने में असमर्थ हैं क्योंकि अपनों से ही ज़ख्मी हैं। अपनों के बीच रहकर खुद को तन्हा पाते हैं क्योंकि स्वार्थ-लोभ, ईर्ष्या, बैर में लिप्त मनुष्य को आज प्रेम-सद्भाव, दया-करुणा, क्षमा और अपनत्व के भाव दिखाई नहीं देते। सादगी से दूर, आज चारों तरफ आधुनिकता की चकाचौंध है। दिल से दिल के सच्चे रिश्ते बनाने में हम असमर्थ हो रहे हैं क्योंकि नफरत हम पर अधिक हावी हो रही है। जब तक हम दुविधाओं से निकल सीधे और स्पष्ट कहने की क्षमता का विकास नहीं करेंगे, सुकून की जिंदगी पाना संभव नहीं। आज के इस कलयुगी दौर में सीधे और सच्चे होने का अर्थ यह नहीं कि तुम ताना-दुर्व्यवहार और दुराचार को सहते रहो, कुछ न कहो। सीधे और स्पष्ट होने का आशय है कि अपनी जगह सही रहो, मन को शांत-शुद्ध रखो। मन में किसी के प्रति छल-ईर्ष्या, कपट-षड्यंत्र मत रखो। धोखा मत दो, दूसरों के जीवन में बेवजह दखल मत दीजिए। किसी पर दबाव मत बनाइए कि वो आपकी सुने, आपके अनुसार रहे। अपने कर्म ईमानदारी से कीजिए। दिल दुखे ऐसी बातें मत कीजिए। घमंड मत करिए। रिश्ते चाहें कोई भी हो उसे दिल से निभाइए, सहयोग दीजिए। जो गलत है उसे गलत कहने की आदत रखिए, किसी को खुश करने के लिए हाँ में हाँ मत मिलाइए। झूठी सांत्वना मत दीजिए। जैसे भीतर हैं वैसे ही बाहर रहिए। कथनी और करनी में समानता रखिए। किसी को खुश करने के लिए ही कार्य मत कीजिए। अपनी गलती को स्वीकार कीजिए। श्रद्धा-भक्ति, विश्वास बनाए रखिए। स्पष्ट कहने की ताकत ही तुम्हें आगे बढ़ने में मदद करेगी।
मन की शांति के लिए सच्चाई की राह पर चलना जरूरी है, झूठ में जीने से आंतरिक बेचैनी बनी रहती है। सीधे और स्पष्ट कहने से समय पर फैसले हो जाते हैं। हम किसी तरह के संदेह में नहीं होते। आत्मबल बढ़ता है। जो सच्चे होते हैं उनके साथ सभी का आशीर्वाद और प्यार होता है। मतलबी रिश्ते एक दिन टूट ही जाते हैं। स्पष्ट और सीधी बात करने से फालतू लोग निकल जाते हैं, आपके जीवन से। जिनसे शिकायत है, उन्हीं से साफ कहो। किसी के सामने बुराई करने से आपका सम्मान नहीं बढ़ जाता।
डर को अपने दिमाग से निकाल दो। अपने जीवन को आप जैसे जीना चाहते हैं, वैसे ही नया मोड़ देते रहिए। जलने-चिढ़ने वालों की चिंता मत करिए। खुद के साथ खुलकर बात करो। ऐसा कोई काम मत करो कि उसे छुपाना पड़े। स्वतंत्र जीना सीखिए। दुनिया की इस भीड़ से बचकर मौन में प्रार्थना कीजिए सच्चे दिल से। निर्भीक बनिए, अपनी शक्ति का सही जगह उपयोग कीजिए। जब हमारी सोच, कार्य और व्यवहार गलत होता है तो मानसिक थकान होती है, दिमाग विचलित होता है, हम अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलन बनाने में खुद को असमर्थ पाते हैं। गलत करके भले ही हम सुख, संपत्ति, सुविधा, पद, प्रतिष्ठा प्राप्त कर लें लेकिन हम लोगों से अपना विश्वास हमेशा के लिए खो देते हैं, आत्मीय रिश्ते छूट जाते हैं। मनुष्य जैसा भीतर से होता है, यदि वैसा ही बाहर से भी रहे, तो वह चिंतामुक्त और प्रसन्न रहता है। सरल और स्पष्टवादी होने का अपना एक विशिष्ट महत्त्व है; इसलिए व्यक्ति को सदैव सरल और स्पष्टवादी बने रहना चाहिए। जीवन में आने वाले हर पल, परिस्थिति तथा अनुभव को बिना किसी शिकायत के खुशी-खुशी स्वीकार करते जाओ।







