सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)


केदारनाथ से लौटी भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा।
खुमेरा में ग्रामीणों की पूछी कुशलक्षेम।
द्वितीय चरण की दिवारा यात्रा का हुआ समापन।
देर सांय भण्डार गृह में विराजमान हुई डोली।
बुधवार को पूजा-अर्चना के बाद पूजा स्थल में होगी विराजित।
ऊखीमठः पतित पावनी सरस्वती नदी के पावन तट पर विराजमान सिद्धपीठ कालीमठ की अधिष्ठात्री भगवती कालीमाई की द्वितीय चरण की दिवारा यात्रा मंगलवार को केदारनाथ धाम से वापस लौट आई। भगवती कालीमाई व बाबा केदार का 15 वर्षों बाद ऐतिहासिक मिलन के पश्चात वापस लौटी दिवारा यात्रा पर मार्ग में श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों ने भावभीना स्वागत किया। दिवारा यात्रा के कालीमठ घाटी में प्रवेश करते ही पूरा वातावरण मां काली के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। केदारनाथ धाम से वापसी के दौरान भगवती कालीमाई की डोली खुमेरा गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मां का स्वागत किया। डोली ने गांव में नगर भ्रमण कर ग्रामीणों की कुशलक्षेम पूछी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां कालीमाई के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। महिलाओं ने मांगल गीतों एवं स्थानीय परंपराओं के साथ मां का अभिनंदन किया, जिससे खुमेरा गांव का वातावरण देर तक भक्तिमय बना रहा।
देर सांय भण्डार गृह में विराजमान हुई डोली
खुमेरा गांव के भ्रमण के पश्चात भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा देर सांय अपने सिद्धपीठ स की ओर रवाना हुई। रात्रि में मां की डोली भण्डार गृह में विराजमान हुई। यहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना एवं आरती संपन्न की गई। बुधवार को प्रातःकाल धार्मिक अनुष्ठानों और विशेष पूजा-अर्चना के पश्चात भगवती कालीमाई की डोली को पुनः पूजा स्थल में विराजमान किया जाएगा। इसके साथ ही द्वितीय चरण की दिवारा यात्रा की धार्मिक परंपराओं का विधिवत समापन होगा।
केदारनाथ में हुआ मां काली और बाबा केदार का पौराणिक मिलन।
दिवारा यात्रा के द्वितीय चरण में भगवती कालीमाई की डोली ने केदारघाटी के विभिन्न गांवों का भ्रमण करते हुए केदारनाथ धाम की यात्रा की। मान्यता के अनुसार निर्धारित अंतराल में होने वाली इस दिवारा यात्रा में मां कालीमाई और बाबा केदारनाथ का पौराणिक मिलन विशेष धार्मिक महत्व रखता है। केदारनाथ धाम में प्रवास के दौरान श्रद्धालुओं ने मां कालीमाई की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-शांति और लोककल्याण की कामना की। केदारनाथ से वापसी के बाद यात्रा ने पुनः अपने पारंपरिक पड़ावों की ओर प्रस्थान किया।
ग्रामीणों में दिखा गहरा आस्था भाव
दिवारा यात्रा के गांव-गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा के तहत ग्रामीण अपने आराध्य देवी-देवताओं की डोलियों का स्वागत कर उन्हें अपने गांव की खुशहाली और जनकल्याण से जोड़ते हैं। भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा भी केदारघाटी की लोक आस्था, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक मानी जाती है। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु डोली के साथ चलकर मां के दर्शन करते रहे।
द्वितीय चरण के निर्विघ्न संपन्न होने पर जताया आभार
भगवती कालीमाई दिवारा यात्रा समिति अध्यक्ष लखपत राणा, महामंत्री सुरेशानन्द गौड़, प्रभारी प्रकाश पुरोहित ने द्वितीय चरण की यात्रा के निर्विघ्न संपन्न होने पर केदारघाटी के विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और जनमानस का आभार जताया। उनका कहना कि मां कालीमाई की दिवारा यात्रा को जिस श्रद्धा, विश्वास और आत्मीयता के साथ ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं का सहयोग मिला, वह क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की जीवंत मिसाल है। उन्होंने यात्रा के दौरान प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। सामाजिक कार्यकर्ता माधव कर्नाटकी ने कहा कि मां भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपरा, आस्था और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। मां कालीमाई के आशीर्वाद से क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और लोककल्याण की कामना की गई।






