सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
विजयदशमी पर घोषित होंगी पंचकेदार के
तीन धामों के कपाट बंद होने की तिथियां।
भगवान केदारनाथ, मदमहेश्वर और तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोलियों के शीतकालीन गद्दी स्थलों में आगमन का कार्यक्रम भी होगा तय।
ऊखीमठः द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी एवं पर्वतराज हिमालय की गोद में विराजमान भगवान केदारनाथ, द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर तथा तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथियां कल विजयदशमी पर्व पर घोषित की जाएंगी। इसी के साथ तीनों धामों से चल विग्रह उत्सव डोलियों के शीतकालीन गद्दी स्थलों में आगमन का कार्यक्रम भी तय होगा। शीतकालीन गद्दी स्थलों में पंचांग गणना के अनुसार होने वाली धार्मिक प्रक्रिया के बाद कपाट बंद होने की तिथियों की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
केदारघाटी के आराध्य भगवान केदारनाथ, मदमहेश्वर और तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथियों को लेकर श्रद्धालुओं एवं मन्दिर समिति की निगाहें विजयदशमी पर्व पर होने वाली घोषणा पर टिकी हैं। परंपरानुसार विजयदशमी के पावन अवसर पर पंचांग गणना के आधार पर शीतकालीन गद्दी स्थलों में कपाट बंद होने की तिथियां निर्धारित की जाती हैं। इसके बाद निर्धारित तिथियों के अनुसार संबंधित धामों में कपाट बंद करने की धार्मिक प्रक्रिया संपन्न होगी।
भगवान केदारनाथ के कपाट बंद होने की तिथि पर रहेगी नजर
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल भगवान केदारनाथ का धाम हिमालय की दुर्गम पर्वत शृंखलाओं के मध्य विराजमान बाबा केदारनाथ करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के केंद्र हैं। विजयदशमी पर्व पर भगवान केदारनाथ के कपाट बंद होने की तिथि घोषित होने के साथ ही धाम से चल विग्रह उत्सव डोली के शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचने का कार्यक्रम भी निर्धारित होगा।
द्वितीय केदार मदमहेश्वर की तिथि भी होगी घोषित
मदमहेश्वर घाटी के शीर्ष पर स्थित द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर का धाम अपनी विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं एवं प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। भगवान मदमहेश्वर के कपाट बंद होने की तिथि भी विजयदशमी पर्व पर पंचांग गणना के अनुसार घोषित की जाएगी। कपाट बंद होने के बाद चल विग्रह उत्सव डोली के शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ आगमन का कार्यक्रम निर्धारित होगा। भगवान मदमहेश्वर की पूजा-अर्चना और कपाट बंद होने से जुड़ी परंपराओं का निर्वहन विधि-विधान से किया जाता है।
तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट बंद होने
की तिथि पर भी लगेगी मुहर
विश्व के सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिरों में शामिल भगवान तुंगनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। विजयदशमी पर्व पर भगवान तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथि घोषित होने के साथ ही चल विग्रह उत्सव डोली के शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ आगमन का कार्यक्रम भी तय किया जाएगा। कपाट बंद होने की तिथि निर्धारित होने के बाद मंदिर से जुड़ी धार्मिक गतिविधियां उसी के अनुरूप संचालित होंगी।
पंचांग गणना के अनुसार निर्धारित होंगी तिथियां


तीनों केदारों के कपाट बंद होने की तिथियों की घोषणा हिमालयी मंदिर परंपराओं की महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रिया है। विजयदशमी पर्व पर होने वाली पंचांग गणना के आधार पर निर्धारित तिथियों से संबंधित धामों की कपाट बंद करने की परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा। इस दौरान चल विग्रह उत्सव डोलियों के धामों से प्रस्थान और शीतकालीन गद्दी स्थलों तक पहुंचने के कार्यक्रम पर भी निर्णय लिया जाएगा। जानकारी देते हुए तुंगनाथ धाम के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कि भगवान केदारनाथ व द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर के कपाट बंद होने की तिथि शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मन्दिर ऊखीमठ में पंचांग गणना के अनुसार घोषित की जायेगी जबकि तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथि शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ में घोषित की जायेगी।








