पेपर लीक कराने वालों को न्यूनतम दो वर्ष की सजा से आजीवन कारावास तक, एक करोड़ तक जुर्माना भी।

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पेपर लीक कराने वालों को न्यूनतम दो वर्ष की सजा से आजीवन कारावास तक, एक करोड़ तक जुर्माना भी।

                 लखनऊ: नकल माफिया पर नकेल कसने के लिए अब कड़ा कानून जांच एजेंसियाें का हथियार बनेगा। सरकार ने उप्र सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनाें का निवारण) विधेयक-2024 विधानसभा में पेश किया है। नए कानून के तहत अब परीक्षा में नकल व पेपर लीक कराने वाले गिरोह के सदस्यों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो सकेगी। इसके लिए न्यूनतम दो वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा का प्रविधान किया गया है। न्यूनतम दो लाख से लेकर एक कराेड़ रुपए तक जुर्माना भी होगा।नए कानून के तहत साल्वर गिरोह के अपराध की पुनरावृत्ति करने पर आजीवन कारावास से न्यूनतम 50 लाख रुपये जुर्माने तक की व्यवस्था की गई है। परीक्षा संचालित कराने वाले एजेंसी व उसके संचालकों की जिम्मेदारी तय किए जाने के साथ ही गड़बड़ी पर उनके विरुद्ध भी कार्रवाई के कड़े प्रविधान किए गए हैं। नए कानून के तहत दोषियों की संपत्तियां भी जब्त की जा सकेंगी।

पेपर लीक के बाद व‍िपक्ष ने सरकार पर सवाल क‍िए थे खड़े
                     पुलिस भर्ती व आरओ-एआरओ परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद विपक्ष ने सरकार पर बड़े सवाल खड़े किए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कड़ा कानून बनाए जाने का निर्देश दिया था।

ग‍िरोह से वसूला जाएगा खर्च

कैबिनेट ने बीते माह उप्र सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अध्यादेश 2024 को स्वीकृति दी थी। मानसून सत्र के पहले ही दिन सरकार ने नए कानून के लिए विधानसभा में विधेयक पेश किया। प्रदेश में अब सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के प्रयोग, पेपर लीक कराने वालाें व साल्वर गिरोह के सदस्यों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कराई जा सकेगी। पेपर लीक कराने वाले गिरोह से परीक्षा में हुआ खर्च भी वसूला जा सकेगा।

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