उत्तराखंड एवं हिमालय राज्यों के दृष्टिकोण से बजट में कुछ नहीं ।

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ब्यूरो :  अनूप नौटियाल देहरादून

उत्तराखंड एवं हिमालय राज्यों के दृष्टिकोण से

बजट में कुछ नहीं। 

एसडीसी फाउंडेशन के प्रमुख अनूप नौटियाल ने मंगलवार को पेश केंद्रीय बजट को हिमालयी राज्यों के दृष्टिकोण से अत्यंत निराशाजनक बताया है। उन्होंने दो टूक कहा है कि Budget 2024 में 9 प्रमुख प्राथमिकताओं में देश के गंभीर पर्यावरणीय और जलवायु चुनौतियों का उल्लेख बेहद कम या ना के बराबर है। विशेष रूप से, पिछले वर्ष हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम के लिए आपदा राहत की मदद के अलावा, भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लिए बजट में जलवायु परिवर्तन या पर्यावरण संबंधित चुनौती को लेक कुछ भी खास नहीं है।
श्री नौटियाल ने कहा कि उत्तराखंड के लिए ग्रीन बोनस या फ्लोटिंग पॉपुलेशन के लिए कोई आवंटन नहीं है। रुद्रप्रयाग और टिहरी जिले देश के 147 जिलों में सबसे अधिक भूस्खलन प्रवण हैं। उम्मीद थी कि बजट में उत्तराखंड के लिए कुछ ग्लेशियर या भूस्खलन अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।
अनूप नौटियाल ने कहा कि समय-समय पर-उत्तराखंड सरकार नीति आयोग, केंद्र और वित्त आयोग से राज्य द्वारा प्रदान की जाने वाली 95,000 करोड़ रुपये की पारिस्थितिकी सेवाओं की बात करती है। कुछ साल पहले, हिमालयी राज्यों ने मिलकर हिमालय मंत्रालय की भी मांग की थी। लेकिन Budget2024 ने फिर से इन मांगों को नजरअंदाज कर दिया। आने वाले समय में GEP के आंकड़े भी उपलब्ध होंगे। उत्तराखंड सरकार को पता लगाना चाहिए कि हर बार उनकी ग्रीन बोनस को अपीलें क्यों विफल हो रही हैं ?
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्रीय बजट 2024 में सिंचाई/बाढ़ न्यूनीकरण सेक्शन में बिहार के लिए 11500 करोड़ रुपये का स्पष्ट आवंटन है। बजट में हमारे प्रदेश के पिछले वर्ष 2023 की आपदा के लिए सहायता पैकेज का उल्लेख है किन्तु सहायता राशि नहीं है। यह अधिक स्पष्ट होता अगर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के लिए भी बिहार की तरह आपदा सहायता राशि निर्दिष्ट की गई होती। उम्मीद है कि हिमालयी राज्यों के लिए भी जल्द ही विवरण सामने आएंगे।
उन्होंने कहा कि पर्यटन के लिए, #Budget2024 में विष्णुपद और महाबोधि मंदिर, राजगीर, नालंदा और ओडिशा का उल्लेख है, लेकिन चार धाम, हरिद्वार, गंगा आदि का कोई उल्लेख नहीं है। यह स्थिति बेहद निराशाजनक है और इस कारण सरकारों की प्राथमिकताएं सवालों के घेरे में आ जाती हैं। उत्तराखंड जैसे बेहद संवेदनशील राज्य की बजट में उपेक्षा किया जाना गले से नहीं उतर रहा है।

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