उत्तराखंड के प्रसिद्ध इतिहासकार जशवंत सिंह कटोक्ष पदमश्री पुरुस्कार से अंलकृत होने के बाद वापस गांव आने पर ग्रामीणों ने भव्य सम्मान समारोह एवं भोज का आयोजन् किया

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उत्तराखंड के प्रसिद्ध इतिहासकार जशवंत सिंह कटोक्ष पदमश्री पुरुस्कार से अंलकृत होने के बाद वापस गांव आने पर ग्रामीणों ने भव्य सम्मान समारोह एवं भोज का आयोजन् किया।

जिसमे तमाम क्षेत्र के समाजिक सरोकारों तालूकात् रखने वाले बुद्धि जीवियों बढ,चढ का समारोह मे भाग लिया कार्यक्रम पहुंचे श्रीनगर नगरपालिका के पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष एवं हिमालय परिषद एवं साहित्य कला श्रीनगर फाउंडर कृष्णानंद मैठाणी ने कहा कि जशवंत ने उत्तराखंड के उन तमाम संस्कृति,संस्कारों बोली, बोली भाषा जवं झज्जर होती धरोहरों पर गहन् शोध किया करके लीपिबद्ध किया जिसको आज विश्वविद्यालय उच्च शिक्षण संस्थानों पढाया जाता है श्री मैठाणी ने कहा कि जशवंत चाहते तो वह किसी नगर व शहर मे रहकर अध्ययन कर सकते थे लेकिन उन्होंने तमाम सुखसुविधाओं को दरकिनार करते हुऐ गांव की बातो गांव बैठकर लिखी जो एक प्रेरणादायक है इसीलिये उनको उनको माटी के लाल से जाना जाता है। पदमश्री जशवंत सिंकी मुख्य पुस्तकों मे मद्य हिमालय की कला,उत्तराखंड का नवीन् इतिहास, सिंग की ग्रंथावली,भजनसिंह का सिंगनाद् सहित् एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की चुकी हैं इस संबंध मे पदमश्री से सम्मानित जशवंत सिंह ने कहा कि एक दर्जन पुस्तकों के लेखन के बाद संस्कृति पर आधारित,यशोधरा एवं उत्तराखंड की सैन्य पृष्ठभूमि जो वीर चंद्र सिहं गढवाली पर आधारित है उसका प्रकाशित भी सीग्र किया जायेगा।
कार्यक्रम मौजूद ऐकश्वर पोटा जिलापंचायत सदस्य सीमा सजवाण ने कहा कि हम स्वयं को भाग्यशाली हैं जो ऐसी कटोक्ष जी जैसी शक्शियतों के सानिध्य रहकर हम प्रतिनिधित्व कररहे हैं जिंन्होने अपनी लेखनी के माध्यम से गढवाल,उत्तराखंड ही नही पूरे देश मे इस माटी का मान बढाया है इस मौके पर उम्मेदसिंह मेहरा,प्रसिद्ध राज्य आंद़ोलनकारी अनिल स्वामी,श्रीमती ऊमा घिल्डियाल सहित् सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।

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