एच1बी वीजा शुल्क वृद्धि का भारतीय आईटी कंपनियों पर प्रभाव।

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संजय सोंधी 

(संयुक्त सचिव) 

भूमि एवं भवन विभाग 

दिल्ली सरकार।

 

एच1बी वीजा शुल्क वृद्धि का भारतीय आईटी कंपनियों पर प्रभाव।

 

अमेरिका द्वारा एच1बी वीजा शुल्क में वृद्धि का भारतीय आईटी कंपनियों पर बहुत कम प्रभाव पड़ेगा। यह शुल्क केवल नए एच1बी वीजा आवेदनों पर लागू है, नवीकरण वीजा पर नहीं।यह कोई वार्षिक शुल्क भी नहीं है। भारतीय आईटी कंपनियां पहले से ही ऑफशोर-ऑनसाइट मॉडल पर काम करती हैं, जहां 70:30 के अनुपात में कर्मचारी होते थे, जो कोविड के बाद 80:20 या 90:10 हो गया है। इससे शुल्क वृद्धि का प्रभाव नगण्य होगा। कंपनियां अमेरिका में कर्मचारियों को 1.5-2.0 लाख डॉलर प्रति वर्ष देती हैं, जबकि भारत में समान गुणवत्ता वाले कर्मचारी 20-30 हजार डॉलर प्रति वर्ष में मिल जाते हैं। इसलिए, यह निर्णय अमेरिका के लिए उल्टा पड़ सकता है, क्योंकि भारतीय कंपनियां भारत में अधिक भर्ती करेंगी।

 

यह गलत धारणा है कि एच1बी वीजा का सबसे बड़ा लाभ भारतीय आईटी कंपनियों को मिलता है। वास्तव में, गूगल की मालिक अल्फाबेट, एपल, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भारतीय प्रतिभाओं को अधिक भर्ती करती हैं। भारतीय आईटी कंपनियों के केवल 3-5% कर्मचारी अमेरिका में हैं। वहां उच्च कौशल वाले कर्मचारियों को रखना लाभकारी था, क्योंकि कंपनियां ग्राहकों से प्रति कर्मचारी 1.5-2 लाख डॉलर प्रति वर्ष लेती थीं, जबकि कर्मचारियों को 95 हजार से 1.15 लाख डॉलर देती थीं। इससे उच्च लाभ मार्जिन बनाए रखने में मदद मिलती थी।

 

हालांकि, भारतीय कंपनियों के पास एल1, बी1 और ओ1 वीजा जैसे अन्य विकल्प हैं। एल1 वीज़ा का उपयोग भारतीय कार्यालय से अमेरिकी कार्यालयों में आईटी कर्मचारियों को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। लेकिन, एल1 वीजा आवेदन पहले बड़े पैमाने पर अस्वीकार किए गए हैं। बी1 वीजा व्यापारिक सम्मेलनों और छोटी अवधि के दौरे के लिए है। इन्फोसिस ने 2013 में इसका दुरुपयोग किया, जिसके लिए उसे 34 मिलियन डॉलर का जुर्माना देना पड़ा। ओ1 वीजा शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए है, जिसमें भारतीय आईटी कर्मचारी शामिल नहीं होते।

 

एच1बी वीजा शुल्क वृद्धि से अमेरिका में रोजगार सृजन में मदद नहीं मिलेगी। भारतीय आईटी कंपनियां ऑफशोर मॉडल पर अधिक ध्यान देंगी, जिससे भारत में आईटी कर्मचारियों के लिए अधिक अवसर पैदा होंगे। अल्पावधि में कंपनियों के लाभ मार्जिन में 0.5-1% की कमी आ सकती है, लेकिन यह उनके व्यापार मॉडल को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगा।इसके अलावा, भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिका के अलावा अन्य भौगोलिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर देंगी।

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