ममता सिंह देवा
दुर्गाकुंड, वाराणसी।
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
परिचय-
ममता सिंह देवा भारत से पाॅटरी एण्ड सिरामिक में मास्टर्स करने वाली पहली महिला हैं । इन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से BFA और MFA (Pottery & Ceramic) किया है। मास्टर्स के दौरान ही इनको “नैशनल कल्चरल स्कालरशिप (1995-96 HRD Ministry)” से प्राप्त हुई थी। विवाह के उपरांत 18 साल के लंबे अंतराल के बाद इन्होंने अपना स्टूडियो (AAKKAAR) स्थापित किया और कार्य प्रारंभ किया इस समय के बीच “स्पीक-मैके” से भी जुड़ीं और जयपुर में “ब्लैक पाॅटरी” की वर्कशॉप भी लिया । कविताएं लिखना तो इन्होंने 1982 से ही प्रारंभ कर दिया था ये गुण इनको अपनी मां से प्राप्त हुआ है। सिनीयर फेलोशिप सम्मान (2015-16 Ministry of Culture) से प्राप्त हुई, इनकी प्रदर्शनियां अलग-अलग शहरों में लगती रहती हैं । इन सबके बीच इनका लेखन जारी रहा और इनके तीन काव्य संग्रह ‘गढ़ते शब्द’, ‘विद्रोह शब्दों का’ और ‘शब्दों को हद पता है’ प्रकाशित हो चुके हैं। इनकी कई लघुकथा संकलन, कविता संकलन, लेख संकलन, हाइकु संकलन प्रकाशित हो चुकी हैं। इन्होंने लेखन की अनेक विधाओं पर काम किया जैसे:- कविता, लघु कथा, कहानी, संस्मरण, लेख, हाइकु, कहमुकरी और बाल रचनाएं । ये लेखन में अनेक ऑनलाइन पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं तथा लघुकथा, कविताएं, लेख और हाइकु के सांझा संकलन प्रकाशित हो चुके हैं । YouTube के कई chenal पर नैरेशन भी करती हैं ।
एनालिसिस
बहुत से कवि/लेखक
स्त्रियों के विषय में
इतनी गहराई से उतर जाते हैं
कि उनका हर दर्द
शरीर का इंच-इंच माप
उनकी गोराई/मोटाई
यहां तक कि
बालों की लंबाई/छोटाई
इन सब पर शोध करके
खुद को डाक्ट्रेट दे डालते हैं
यहां तक कि चलने/मुस्कराने की
क्या अदा और क्या वजह है
ये वो ज्यादा बेहतर जानते हैं
इनसे पूछती हूं कि
जितना स्त्रियों को बाहर से
जानने का दम भरते हो
उतना उसके भीतर
एक दिल/दिमाग भी है
उसको जान पाने की
बिसात रखते हो?
कभी कोशिश भी की है?
अगर की होती तो
उनका ऊपरी एनालिसिस
कत्तई ना करते
उसके दिल/दिमाग को
अपने दिल/दिमाग से जानकर
खुद से खुद का
स्त्रियों से भी बेहतरीन
एनालिसिस करते ।







