सुश्री सरोज कंसारी
लेखिका/कवयित्री/शिक्षिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति,
गोबरा नवापारा, राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
”वंदेमातरम् जयघोष रहेगा”
(काव्य)
हिंद की जमीं पर न कोई विवाद रहेगा,
मजहब व जाति में बंटा न देश रहेगा।
वीरों की गाथा माटी का हर कण कहेगा,
हर भारतीय वंदेमातरम जयघोष करेगा।
जन-गण-मन का सम्मान दिल में रहेगा,
तिरंगा आसमान की बुलंदी में फहरेगा।
कश्मीर घाटी में दुश्मन झाँक न सकेगा,
आजादी के वास्ते जान निसार रहेगा।
रामराज्य फिर से लाने का प्रयास रहेगा,
भारत की शान को सैनिक मिटने न देगा।
सोने की चिड़िया मेरा देश बनकर रहेगा,
शांति, समन्वय, सद्भाव चारों ओर रहेगा।
देशप्रेम का जज्बा धड़कन में रहेगा,
भ्रष्टाचारी व दुराचारियों का अंत होगा।
संकल्प यही अब हरपल जेहन में रहेगा,
मेरा देश जगसिरमौर बनकर ही रहेगा।
भूख, गरीबी का न नामोनिशान रहेगा,
अन्नधन से परिपूर्ण अब ये धरा रहेगा।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पर गर्व रहेगा,
जननी जन्मभूमि स्वर्ग से बढ़कर रहेगा।
हर बालक गौतम, गांधी व सुभाष बनेगा,
सर्वे भवन्तु सुखिनः का भाव मन में रहेगा।
राममंदिर निर्माण में समर्पित ये तन रहेगा,
जवान तुझे सलाम पूरा हिंदुस्तान करेगा।







