सुश्री सरोज कंसारी
लेखिका/कवयित्री/शिक्षिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति,
गोबरा नवापारा, राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
”मेरा गाँव”
(काव्य)
मेरा एक छोटा सा गाँव है, सुंदर।
और स्वच्छ वहाँ का माहौल है।
पीपल का जहाँ छाँव है, बहती।
प्रेम की वहाँ धारा है, नफरतों।
का न कोई भी नामोनिशान है।
शांत और सुकून से भरा होता है,
हरपल बुजुर्गों का मिलता है।
सबको आशीर्वाद, सुबह सभी।
एकदूजे से मिलकर करते राम-राम,
भाईचारे का होता है भाव।
सुख-दुख में सभी होते हैं साथ,
करते नहीं किसी से कोई फिर।
भेदभाव, एक छोटा सा चौपाल है,
बच्चे, बुजुर्ग और युवा बैठकर।
वहाँ करते हैं हँसी और ठिठोली।
अपनेपन से सभी सरोबार हैं,
हर समस्या का होता यहाँ तो।
समाधान, हर कोने में यहाँ।
पेड़ और पौधे हैं, मिलता है हमें।
लकड़ी, फल-फूल और सब्जी हैं।
प्रकृति के सानिध्य में बसा मेरा।
गाँव है, प्रदूषण से मुक्त, मिलता।
हमें शुद्ध हवा है, शोरगुल से दूर।
है यहाँ, पूरा गाँव ही एक परिवार।
है सभी को एकदूजे से लगाव है।
गोधूलि बेला में सुनाई देती है हमें,
गायों के गले में बंधी घंटनाद।
सब पूछते हैं एकदूजे का हालचाल,
भी सहयोग को रहते हैं तत्पर सभी के।
रहते नहीं कोई किसी भी अभाव में।।







