सुश्री सरोज कंसारी
लेखिका/कवयित्री/शिक्षिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति,
गोबरा नवापारा, राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
गुरु – दिव्य प्रकाशपुंज
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सद्व्यवहार से श्रेष्ठ मानव को गढ़ते,
अबोध मन में ज्ञान का सार हैं भरते।
गुरु दिव्य प्रकाशपुंज, अंधियारा हरते,
मझधारों से पार जीवन-नैया करते।
भटके राही को मंजिल का पता देते,
सत्कार्य, सत्पथ पर चलना सिखाते।
मायूसी में उत्साह का संचार करते,
वर्णों के मेल से सार्थक अर्थ रचते।
प्रलय व सृजन अपनी गोद में रखते,
आवश्यकतानुसार आविष्कार करते।
नवनिर्माण के क्षेत्र में प्रयासरत रहते,
नई उड़ानों के लिए हौसला हैं भरते।
कर्मभूमि में संघर्ष हेतु अग्रसर करते,
आत्मा को परमात्मा का परिचय देते।
हर कठिन प्रश्न का सहज हल बताते,
अस्थिर मन में ध्यान का केंद्र बनते।
शब्दों के मेल से सरगम नया सजाते,
वीणा की हर तार तरंगित है तुमसे।
कठिनाइयों से जूझना भी सिखाते,
यज्ञभूमि में कर्म की आहुति दिलाते।
मंथन कर सारगर्भित बातें समझाते,
उलझी गुत्थी को धैर्यपूर्वक सुलझाते।
दुख-पीड़ा सहन करने की सीख देते,
कोरे मन में जीवन का सार हैं भरते।
असमंजस में निष्पक्ष न्याय कर लेते,
ब्रह्मा, विष्णु और महेश तब कहलाते।
धरा की धीरज से उच्च शिखर पहुंचाते,
हे ! गुरुवर हृदय से नमन तुम्हें करते।।







