राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
मैनपाट, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
पहचान
(कविता)
आख़िरी सांस तक लिखेंगे हम,
कलम नहीं रुकेगी हमारी कभी,
कोई पढ़े या न पढ़े,,
यह उसकी मर्ज़ी है, उसकी खुशी।
शब्दों में छिपा है, दर्द का सागर,
हर पंक्ति में, धड़कता है जीवन मेरा
चाहे कोई सुनने वाला हो, न हो,
गूंजता रहेगा, शब्दों का असर
कागज़ पर गिरती हैं, बूंदें स्याही की,
आँखों से गिरते हैं, आँसू कभी – कभी
न कोई ताली, न कोई वाह-वाह,
लिखते रहेंगे हम, खामोशी से सदा
आखिरी सांस तक, लिखेंगे हम,
क्योंकि लिखना ही है हमारी पहचान है,
पढ़ने वाला, मिले या न मिले
लिखा, तो रहेगा हमेशा, हमें रहें या न रहें।







