सुल्तान अली गहलोत
(शिक्षक एवं कवि)
पूर्व छात्र, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
अलीगढ़, (उ.प्र.)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड
ये हौसला हमारा है (गजल)
दिल को तेरी याद का, अब भी सहारा है।
तू दूर सही लेकिन, दिल को तू ही प्यारा है।
हालात ने मुझको आजमाया बहुत मगर,
हर दौर में हँसकर मैंने, ख़ुद को सँवारा है।
जब शाम ढले तो चाँद भी, बादल में छुप जाए,
यादों में तेरी आज भी, इक रोशन नज़ारा है।
अँधेरों से डरना, मेरी फ़ितरत में है ही नहीं,
उम्मीद का सीने में इक चमकता सितारा है।
दुनिया की भीड़ में, लाख चेहरे मिले लेकिन,
दिल ने जिसे अपना कहा, वो सबसे प्यारा है।
गिरकर सँभलना तो जीवन की कहानी है,
जो हार गया कल, वही जीता दोबारा है।
‘सुल्तान’ तू अपने ही सफ़र पर यकीं रख,
मंजिल से कहीं बढ़कर ये हौसला हमारा है।







