प्रा.डॉ. शंकर घनशामदास अंदानी (आचार्य, सी ए.) अहिल्या नगर, महाराष्ट्र
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
दशहरा (विधा- कविता)
दशहरा लाता खुशियों की बहार, जीत सत्य की, मिटे झूठ का अंधकार। राम के आदर्शों से जीवन सँवारें, प्रेम और सद्भाव के दीप जलाएँ।
रावण के पुतले का दहन करें आज, मन से मिटाएँ अहंकार का राज। काम, क्रोध, लोभ को दूर भगाएँ, सत्य और धर्म की राह अपनाएँ।
सीता के सम्मान का संकल्प लें, मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श चुनें। अन्याय के आगे न शीश झुकाएँ, निर्बल के अधिकारों की रक्षा करें।
बुराई पर अच्छाई की विजय का त्योहार, खुशियों से महके अपना संसार। हर मन में मानवता का वास हो, हर घर में प्रेम और विश्वास हो।
नई उमंग, नई आशा का संदेश लाए, हर जीवन में खुशियों के रंग सजाए। आओ मिलकर करें यह शुभ विचार, सत्य की विजय हो, मंगलमय हो दशहरा त्योहार!







