पूर्वोत्तर भारत से उभरा नया शतरंज सितारा, मयंक चक्रवर्ती

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हेमंत खुटे

 

               (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

पूर्वोत्तर भारत से उभरा नया शतरंज सितारा, मयंक चक्रवर्ती

 

 

 

भारत के शतरंज जगत में एक नया सितारा चमका है, जिसने अपनी प्रतिभा से इतिहास के पन्नों में जगह बना ली है। असम के युवा खिलाड़ी मयंक चक्रवर्ती ने अद्भुत प्रदर्शन करते हुए देश को उसका 94 वां ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव दिलाया। 16 वर्षीय इस उभरते हुए खिलाड़ी ने स्टॉकहोम ( स्वीडन) में आयोजित 8 वें जी एम टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल किया। मयंक ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता में 9 में से 7 अंक हासिल कर न केवल अपना स्थान पक्का किया, बल्कि शतरंज की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा भी मनवाया।इस बड़ी उपलब्धि के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शतरंज की 2500 फीडे रेटिंग का आंकड़ा भी पार कर लिया है, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए टेढ़ी खीर के समान है। इस उपलब्धि के साथ मयंक असम और पूर्वोत्तर भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बन गए हैं।

मयंक का शतरंज से परिचय मात्र छह वर्ष की आयु में हुआ। उनकी माँ, डॉ. मानोमिता चक्रवर्ती, जो पेशे से स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं, ने ही उन्हें इस बौद्धिक खेल की दुनिया से परिचित कराया। प्रारंभिक दिनों में मयंक की रुचि शतरंज में विशेष रूप से नहीं जगी और उनका झुकाव बैडमिंटन की ओर अधिक रहा।

उस समय बैडमिंटन खिलाड़ी पी व्ही सिंधु की उपलब्धियाँ, विशेषकर 2016 ओलंपिक में जीता गया रजत पदक, युवा मयंक के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। वे भी बैडमिंटन में कुछ बड़ा करने का सपना देखने लगे। किन्तु समय के साथ उन्होंने यह अनुभव किया कि बैडमिंटन की शारीरिक मांगें उनके स्वभाव और क्षमताओं के अनुकूल नहीं हैं। यही वह क्षण था जब उन्होंने एक निर्णायक मोड़ लेते हुए पुनः शतरंज की ओर रुख किया। यह निर्णय उनके जीवन का वास्तविक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसने आगे चलकर उन्हें सफलता की इस नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

मयंक की प्रतिभा बचपन से ही स्पष्ट रूप से परिलक्षित होने लगी थी। कम उम्र में ही उन्होंने अपनी असाधारण क्षमता का परिचय देते हुए कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अपने नाम कीं। ये उपलब्धियाँ न केवल उनकी मेहनत और लगन को दर्शाती हैं, बल्कि उनके करियर के मील के पत्थर भी साबित हुई हैं।

वर्ष 2019 में मयंक ने नेशनल अंडर-11 ओपन शतरंज चैंपियन बने। इसी वर्ष उन्होंने एशियन यूथ शतरंज चैंपियनशिप (अंडर-10) में रजत पदक प्राप्त किया।

2022 एवं 2023 में नेशनल अंडर-17 शतरंज चैंपियन में लगातार दो बार विजेता बने। मयंक को कंडीडेट मास्टर (सी एम,वर्ष 2021), इंटरनेशनल मास्टर (आई एम,वर्ष 2024)

ग्रैंडमास्टर (जी एम, वर्ष 2026) जैसे प्रतिष्ठित शतरंज टाइटल भी प्राप्त हो चुके हैं।

मयंक चक्रवर्ती ने ग्रैंडमास्टर बनने की कठिन राह पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित टूर्नामेंट्स में चोला जी एम नॉर्म टूर्नामेंट

चेन्नई, भारत (2025),यंग टैलेंट्स जी एम टूर्नामेंट स्टॉकहोम, स्वीडन (2026) और होटल स्टॉकहोम नॉर्थ जी एम टूर्नामेंट तीनों जी एम नॉर्म्स अर्जित किए। उनकी यह उपलब्धि उनकी प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।

 

भारत को मिला 94 वें वां ग्रैंडमास्टर

 

भारतीय शतरंज जगत के लिए यह अत्यंत गौरव और उत्साह का क्षण है कि उभरते हुए प्रतिभाशाली खिलाड़ी मयंक चक्रवर्ती ने प्रतिष्ठित ग्रैंडमास्टर (जीएम) खिताब हासिल कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ ही वे भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर बन गए हैं और अपने नाम को शतरंज इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज करा चुके हैं।

इस उपलब्धि की सबसे विशेष बात यह है कि मयंक नॉर्थ ईस्ट भारत से ग्रैंडमास्टर बनने वाले पहले खिलाड़ी हैं। उनकी यह सफलता न केवल व्यक्तिगत जीत है, बल्कि पूरे क्षेत्र में शतरंज के विकास और पहचान को एक नई दिशा देने वाली है।

मयंक ने अपना अंतिम और निर्णायक जीएम नॉर्म होटल स्टॉकहोम नॉर्थ यंग टैलेंट्स टूर्नामेंट में हासिल किया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 में से 7 अंक अर्जित किए और प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस दमदार प्रदर्शन के साथ उनकी लाइव रेटिंग 2508 तक पहुँच गई, जो ग्रैंडमास्टर बनने के लिए आवश्यक मानक से अधिक है।

खेल शैली की बात करें तो मयंक चक्रवर्ती अपनी आक्रामक, ऊर्जावान और रणनीतिक शैली के लिए जाने जाते हैं। वे अक्सर सिसिलियन डिफेंस और रुई लोपेज जैसी लोकप्रिय ओपनिंग्स का प्रयोग करते हैं, जो उनके खेल को धारदार और अप्रत्याशित बनाती हैं। दबाव की परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना और निर्णायक क्षणों में सटीक चाल चलना उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

निस्संदेह, मयंक की यह ऐतिहासिक सफलता देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। विशेषकर नॉर्थ ईस्ट भारत के उभरते हुए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि जुनून, समर्पण और निरंतर मेहनत के साथ कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता।

मयंक की सफलता के पीछे उनकी माँ का विशेष योगदान हमेशा सबसे महत्वपूर्ण रहा है। उनका कहना है कि ग्रैंडमास्टर का खिताब अभी तो सिर्फ शुरुआत है, आगे उन्हें आसमान में ऊंचा उड़ान भरना है। मयंक के प्रत्येक टूर्नामेंट में उनकी माँ हमेशा साथ रही और हर कदम पर मार्गदर्शन प्रदान करती रही, जिससे मयंक को मानसिक और भावनात्मक सहारा मिलता रहा।

इसके अलावा, अनुभवी कोच सप्तर्षि रॉय चौधरी और स्वयं मिश्रा ने भी उनके खेल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी तकनीकी प्रशिक्षण और रणनीतिक मार्गदर्शन ने मयंक को उच्च स्तर के प्रतियोगियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार किया।

मयंक के आदर्श भारत के महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद हैं। उनसे मिलना और उनके अनुभव से सीखना मयंक के लिए हमेशा एक बड़ा प्रेरणास्रोत रहा है।

उनका अगला लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना और भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर और बड़े खिताब जीतना है। मयंक का मानना है कि निरंतर अभ्यास, समर्पण और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

मयंक चक्रवर्ती आज केवल अपने राज्य और क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं। उनका यह सफर युवा पीढ़ी को यह स्पष्ट संदेश देता है कि समर्पण, अनुशासन और निरंतर प्रयास से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

मयंक ने मात्र छह वर्ष की आयु में शतरंज खेलना प्रारंभ किया और अपने बचपन में देखे गए सपनों को केवल दस वर्षों में साकार कर दिखाया। इस छोटे से समय में उन्होंने न केवल खेल की तकनीक में महारत हासिल की, बल्कि मानसिक दृढ़ता और रणनीतिक सूझ-बूझ भी विकसित की। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि अगर जुनून, मेहनत और सही मार्गदर्शन हो, तो सपने सच में हकीकत बन सकते हैं।  (विभूति फीचर्स)

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