सुश्री सरोज कंसारी
लेखिका/कवयित्री/शिक्षिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति,
गोबरा नवापारा, राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
संघर्ष की घड़ी में भी अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहिए और अपने सपनों को याद रखिए! – सुश्री सरोज कंसारी
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कविता:
”आज की भीषण, तेज दुनिया में,
*शधैर्य रखना आवश्यक होगा…
शान्ति तो तब, समस्याओं से,
इंसान चिपकना छोड़ दे।”
हौसले का नाम ही जिंदगी है। डर हमें कमज़ोर करता है। जीवन के कठिन सफर में उम्मीद ही सहारा बनती है। जब सब कुछ खत्म होता नज़र आए तो मायूसी घेर लेती है। दर्द से निकलने के लिए सोच सकारात्मक रखिए। अंत तक कुछ न कुछ बाकी रहता है, बस उम्मीद मत खोना। जो साहस के साथ खड़े होते हैं, वे डगमगाते नहीं। असफल होकर भी कोशिश जारी रखिए। दिल में कुछ कर गुज़रने का जज़्बा है, तो डर से आगे जाइए। अपने सपनों को पूरा कीजिए। जब तक जीवित हैं, उत्साह के साथ काम कीजिए। जब तक सामर्थ्य है, किसी बात से टूटना मत। तुम शक्तिशाली हो और सब कुछ अपनी मेहनत से पा सकते हो। गिर गए, असफल हो गए, धोखा मिला, कुछ खो दिया — कोई बात नहीं। फिर से जागृत, उत्साहित और सक्रिय हो जाइए। एहसास ज़िंदा रखिए। दुखी होकर मुरझाइए मत। चाहे कोई कितनी भी साजिश करे, कितनी भी चालाकी से तुम्हें हराने की कोशिश करे, तुम निराश मत होना। पीछे मत देखना कभी। लोगों की छोटी सोच को मन में मत भरना। तुम्हारी जीत निश्चित है।…सहनशीलता कोई कमजोरी नहीं होती, यह हर मनुष्य की आंतरिक शक्ति होती है। इसी के बल पर मनुष्य जीवन की चुनौतियों का सामना दृढ़ता से कर सकता है। जो मनुष्य जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सामंजस्य बना लेते हैं और विपत्ति आने पर भी धैर्य नहीं खोते, वे हर दर्द को समेट कर जीवन का आनंद लेते हैं। बाहर मुस्कुराने के लिए भीतर बहुत कुछ दफन करना ज़रूरी है।
जो अंतर्मन के युद्ध को शांत कर लेते हैं, वे किसी परिस्थिति में विचलित नहीं होते। ऐसे मनुष्य को दुनिया की कोई भी शक्ति हरा नहीं सकती। जीवन की रणभूमि में जो शांत होकर युद्ध सहते हैं, वे असली विजेता होते हैं। अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए जो जीवन पथ में आने वाली समस्याओं से घबराते नहीं, बल्कि सामना करने को तैयार होते हैं, वे साधारण नहीं होते। उनके पास असीम शक्ति का एक अदृश्य स्रोत होता है। बाहरी दुनिया के किसी भी झगड़े, विवाद, तनाव, ताने और दुर्व्यवहार को दिमाग में भरकर मत रखिए, तभी आप मजबूत बन पाएँगे। संतुष्ट जीवन के लिए प्रयास कीजिए। मन को दुखी मत रखिए। जो सहन करके आगे बढ़ते हैं, वे मानसिक रूप से स्वस्थ होकर जीते हैं। यही अंदरूनी ताकत है, जो सब में नहीं होती। सहनशील बनकर हम जीवन को एक नई राह देते हैं, जहाँ दुविधाओं से दूरी बनती है। नामुमकिन कुछ भी नहीं। धैर्य का परिचय देकर और वक़्त का इंतज़ार करके आप अपने हर बिगड़े काम को बना सकते हैं। जो हर बात में क्रोध करते हैं, बदले का भाव रखते हैं और बिना सोचे तुरंत फैसला लेते हैं, वे बाद में पछताते हैं।
हम शांत रहना चाहते हैं, पर सवाल ये है कि क्या हमने समस्याओं से चिपकना छोड़ दिया है या आज भी उन्हें सीने से लगाए हुए हैं? शांति अपने आप नहीं आती। पहले अपने अंदर क्रांति करनी होगी। पुरानी सोच, गुस्सा, शिकायतों को तोड़ना होगा। तभी असली शांति मिलेगी।…संघर्ष की घड़ी में भी अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहिए और अपने सपनों को याद रखिए। जहाँ मंज़िल है, उस ओर चलिए। बेवजह मत भटकिए। नफरत, बैर, ईर्ष्या, हर बात पर उत्तेजित होना और दूसरों की कमियाँ देखना मनुष्य की मानसिकता को बीमार करता है। जो भी परिस्थिति बने, उस पर शांत होकर विचार कीजिए। समझदारी का परिचय जीवन के हर क्षेत्र में दीजिए। कहने वाले अपना काम करेंगे, करना क्या है इसका निर्णय हमें खुद करना है। मुश्किल पल में मन को स्थिर कीजिए और अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखिए।…त्याग, संयम और धैर्य को धारण कीजिए। अपमान का हर घूँट पीकर जीवन को सहज कीजिए। जो व्यक्ति कड़वाहट को भूलकर प्रेम बाँटते चलते हैं, वे बिखरी हुई खुशियों को सहेज लेते हैं। मन में ठान लीजिए कि चाहे जीवन का कोई भी दौर हो, गलत रास्ता नहीं अपनाएँगे। हार को भी स्वीकार करना सीखिए। मेहनत में कमी मत कीजिए, हौसला रखिए। मर्यादा कभी मत भूलिए, हर काम अपनी सीमा में कीजिए। मन को काल्पनिक बातों से दूर रखिए और जितना हो सके वास्तविक बने रहिए।
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