“प्रकृति से सीखते रहकर बिना माँगे बाँटते चलो”

Spread the love

 

 

सुश्री सरोज कंसारी

कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका

रिपोर्टर एवं उद्घोषिका

नवापारा-राजिम, रायपुर, (छ.ग.)

 

 

                (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

आलेख

———–

 

“प्रकृति से सीखते रहकर बिना माँगे बाँटते चलो”

 – सुश्री सरोज कंसारी

———————————————

 

सुबह की पहली किरण बिना कुछ मांगे संसार को आलोकित करती है। पुष्प निस्वार्थ भाव से महक बांटते हैं और नदियाँ बिना किसी शर्त के सबकी प्यास बुझाती हैं। प्रकृति के इस परोपकारी रूप से सीख लेकर हमें भी प्रकृति से यही सीखते रहना चाहिए।

 

संसार से केवल पाने का भाव होने के कारण मन व्याकुल होता है। जब से हम होश संभालते हैं, अर्थात सांसारिक सुख का बोध होता है, तब से कुछ न कुछ चाह बनी रहती है जो आजीवन चलती है। एक पल भी सुकून नहीं मिलता। सोते-जागते, उठते-बैठते मन-मस्तिष्क में एक ही बात घूमती है — “काश! अमुक चीज़ मिल जाती तो अच्छा होता।” और अगर वह मिल भी जाए, तो दूसरे ही पल ध्यान किसी और को पाने की ओर चला जाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि पूर्ण रूप से तृप्त हो पाना मोह-माया में लिप्त मनुष्य के लिए संभव ही नहीं है। जब तक पाते रहने की लालसा नहीं थमती, यह सिलसिला चलता ही रहेगा। आजीवन मृग की भाँति हम इस नश्वर संसार में भटकते ही रहेंगे। अलौकिक सुख की प्राप्ति केवल आध्यात्म की उच्च पराकाष्ठा पर पहुँचने पर ही हो सकती है। जो व्यक्ति किसी को पल भर की खुशी देने की सोच रखता है, और जिससे किसी के मन में खुशी की लहर दौड़ जाती है, मानव में सबसे श्रेष्ठ वही है। शांत चित्त से सोचें तो पाएंगे कि देने के लिए लखपति या करोड़पति होना बिल्कुल ज़रूरी नहीं। पास में एक फूटी कौड़ी भी न हो, तब भी आप दुनिया को वह बेशकीमती तोहफ़ा दे सकते हैं जो दुनिया की हर दौलत से बढ़कर है।

 

”कविता”

 

  ”मनुष्यों! तुम नित 

  प्रकृति से सीखकर

  बिना माँगे बाँटना सीखो।

  इस जीवन की 

  सेवा में ही आनंदित रहना।”

 

मानवीय संवेदनाएँ हर किसी के पास होती हैं। जरा देकर देखिए — प्रेम और स्नेह भरे दो शब्द। नफ़रत से भरा हृदय भी पिघल जाए तो कहना। गिरते हुए आँसू पोंछकर देखिए। किसी के ज़ख्म पर अपनत्व का मरहम लगा दीजिए। किसी की मुसीबत में पहले कंधे पर हाथ रखिए। किसी चेहरे की मायूसी पढ़कर जो आनंद आपको आएगा, वह और कहीं ढूंढने से नहीं मिलेगा। देने के लिए हमारे पास बहुत कुछ है — दया, करुणा, ममता, वात्सल्य, अपनत्व, सद्व्यवहार, सौम्यता, शालीनता और न जाने क्या-क्या। यह सब हमारे अंतस की गहराई में भरा है। कभी टटोलकर देखिए, और भी बहुत कुछ मिलेगा। मानवता के ये कीमती, चमकते हीरे निकालिए और दोनों हाथों से लुटा दीजिए। फिर आप कभी नहीं कह पाएंगे कि “देने के लिए कुछ नहीं है।” पाने की चाह को मिटाकर देखिए, फिर जो मिलेगा उसकी आप कल्पना भी नहीं कर पाएंगे। जहाँ लेने की चाह पनपती है, वहीं से तृष्णा का जन्म होता है। तृष्णा मन की शांति और सुकून के पलों को पूरी तरह नष्ट कर व्यक्तित्व को धूमिल कर देती है। लोभ, मोह, मद और माया ही दुख के कारण हैं। समय रहते इस बात को समझ लें तो परम सुख की प्राप्ति होगी, और न समझ पाए तो कतरा-कतरा ग़म की अग्नि में पिघलते रहेंगे।

 

इसलिए हमेशा तैयार रहें — अपने हों या बेगाने, सभी को प्यार के इंद्रधनुषी रंग में रंगने के लिए। जरा सोचिए! सब कुछ तो एक दिन यहीं छूट जाना है। फिर केवल पाने के लिए ही बेचैनी क्यों पालकर रखते हैं? रूप-रंग, बचपन, यौवन, बुढ़ापा, धन-दौलत, महल — सब एक समय तक ही रहेंगे। हम भी इसी माटी में मिल जाएंगे। जो भौतिक साधन एकत्रित करेंगे, वे यहीं रह जाएंगे। और जो हम देंगे, वह रूह में समाहित रहकर सदियों तक सबकी याद बनकर रहेगा। अब आप ही निर्णय करें — देने का भाव ज़रूरी है, या लेने की चाह में इस नर्क-लोक में भटकते रहना। फैसला आपके हाथ में है. क्या पाना है और क्या खोना है? व्याकुल होकर पल-पल मरने से बेहतर है एक सादगी भरी ज़िंदगी जीना, जिसमें सुकून के पल हों। स्वर्ग और नर्क की ज़िंदगी हमें यहीं मिलती है। बस सोच को बदलकर देखिए और संसार की इस उलझन से निकलकर खुशियों के खुले आसमान में विचरण कीजिए। फिर तो यह सारा जहान आपके कदमों में होगा।

—————————————-

  • Related Posts

    सशक्त हस्ताक्षर की 51 वीं काव्य गोष्ठी में गूॅंजे कविता के स्वर 

    Spread the love

    Spread the love  सौजन्यः संगम त्रिपाठी                   (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)   सशक्त हस्ताक्षर की 51 वीं काव्य गोष्ठी में गूॅंजे कविता के…

    देश-विदेश के 69 लघुकथाकारों में डॉ. सत्यवान सौरभ और डॉ. प्रियंका सौरभ की लघुकथाएँ शामिल।

    Spread the love

    Spread the love    ✍️  डॉ. प्रियंका सौरभ    पीएचडी (राजनीति विज्ञान)    (कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक)                     (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)  …

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    सशक्त हस्ताक्षर की 51 वीं काव्य गोष्ठी में गूॅंजे कविता के स्वर 

    • By User
    • August 10, 2026
    • 13 views
    सशक्त हस्ताक्षर की 51 वीं काव्य गोष्ठी में गूॅंजे कविता के स्वर 

    देश-विदेश के 69 लघुकथाकारों में डॉ. सत्यवान सौरभ और डॉ. प्रियंका सौरभ की लघुकथाएँ शामिल।

    • By User
    • August 10, 2026
    • 7 views
    देश-विदेश के 69 लघुकथाकारों में डॉ. सत्यवान सौरभ और डॉ. प्रियंका सौरभ की लघुकथाएँ शामिल।

     ”सावन है शिव कृपा का मास”

    • By User
    • August 10, 2026
    • 9 views
     ”सावन है शिव कृपा का मास”

    फिरोजपुर सिटी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो स्नैचर गिरफ्तार

    • By User
    • August 10, 2026
    • 14 views
    फिरोजपुर सिटी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो स्नैचर गिरफ्तार

    यक्ष प्रश्न ! (कविता)

    • By User
    • August 10, 2026
    • 9 views
    यक्ष प्रश्न ! (कविता)

    गजल

    • By User
    • August 10, 2026
    • 3 views
    गजल