राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
मैनपाट, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
बदलती दुनिया में, खुद बदल न सका,
सच की तलाश रही, झूठ कह न सका।
हर कदम पर नकाबपोशों का मेला था,
असल की तलाश में चैन से सो न सका।
जिंदगी ने सिखाया सच को अपनाना,
झूठों की महफिल में खुश हो न सका।
गजल के लफ्जों में दिल ने पुकारा तुझे,
दुनिया मिली बहुत, तेरा नाम ले न सका।
सुकून की राह में भटकता हूँ रोज ही,
चाहा पाया नहीं, किया पूरा हो न सका।






