हर लम्हा एक जंग है, जिंदगी और आपको जीतकर दिखाना है।

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सुश्री सरोज कंसारी

कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका/रिपोर्टर/उद्घोषिका

नवापारा राजिम,  रायपुर, (छत्तीसगढ़)

 

 

               (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

आलेख:

 

हर लम्हा एक जंग है, जिंदगी और आपको जीतकर दिखाना है।

                 -सुश्री सरोज कंसारी

 

 

‘जीवन को खूबसूरत बनाने का सबसे बड़ा आंतरिक गुण हमारी भाषा व हमारा व्यवहार है। इस सफर में हमेशा अपने व्यवहार को विनम्र रखने की कोशिश करनी है। मन में शांति बनाए रखते हुए, अपने श्रेष्ठ कर्मों से जीवन को एक सुंदर कविता की तरह सजाना है।

 

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”जिंदगी एक कोरा कागज़ है,

इस पर गीत-कविता लिखते जाओ।

मधुर वाणी और शांत स्वभाव,

बना रहे, यही कामना करते जाओ।”

 

जिंदगी उपहार है, खोना नहीं, छोटी-छोटी बातों पर रोना नहीं। जिंदगी सबसे अनमोल उपहार है जो हमें अमानत के रूप में मिली है। न जाने कितने दिन इस संसार में मेहमान हैं। एक दिन तो सभी को पंछी बनकर आसमान में उड़ जाना है। सांसों के चलते ही कहानी है। फिर हम कहाँ और आप कहाँ होंगे, पता नहीं। तो क्यों न इस जीवन में अपने किरदार को श्रेष्ठ अभिनय से सुशोभित करें? सांसारिक जीवन में रहते हुए उन हसीन लम्हों को मुट्ठी में कैद कर लें जो दिल को सुकून दें। यूं तो परेशानी का अंत नहीं, पर थक-हारकर उदास बैठ जाना कोई कला नहीं। जीवन-पथ पर चलते हुए बहुत-सी अच्छी-बुरी बातें होती रहती हैं। इसका यह मतलब नहीं कि सिर्फ दुख की आंधी चलती है, सुख की बरसात भी तो होती है।

 

कभी भी किसी एक पहलू पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए। जैसे सिक्के के दो पहलू होते हैं, वैसे ही हार के बाद जीत होती है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है, जिसे स्वीकार करना ही चाहिए। सबसे बड़ी बात, किसी प्रकार की असमंजस या अनिर्णय की स्थिति आए तो उसे मन में दबाकर न रखें। गुमसुम न रहें। अपनी समस्याओं को अपनों से साझा करें। याद रखिए, ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका कोई समाधान न हो। आपके पास ज्यादा दुख हैं, इसलिए आपका दिमाग काम नहीं कर रहा, इसका यह मतलब नहीं कि सारे द्वार बंद हो गए।

 

कई मोड़ हैं जीवन में। कहीं से भी आप रास्ता बना सकते हैं, पर सबसे ज़रूरी है अपना मनोबल ऊँचा रखना। अपने मित्रों, पड़ोसियों, रिश्तेदारों और अपनों से खुलकर बातें करें। खुशियाँ कहीं बाजारों में नहीं बिकतीं। उसे तो अपनों के साथ रहकर तलाश करना पड़ता है। खुशी के लिए माहौल खुद निर्मित करें। गम को जिंदगी का हिस्सा बना लें और दर्द को अंतस में छुपा लें और होंठों पर मुस्कान सजा लें। हर परिस्थिति का डटकर सामना करें।

 

आज के परिवेश में नफरत का विष घुला है। जरा-सी बात में गुस्सा करना, मनमुटाव, बैर करना, अलगाव की स्थिति होना स्वाभाविक है, क्योंकि पाश्चात्य संस्कृति हावी हो गई है। घर का माहौल अब शांत, धार्मिक, संस्कारित, पारिवारिक भाव, अपनापन, नैतिक गुण, भाईचारा, संयम की कमी है। लोग आज किसी की बात सुनना नहीं चाहते। स्वतंत्र जीवन जीना चाहते हैं। बंधन, मर्यादा, परंपरा का निर्वहन पसंद नहीं करते। अपने से बड़ों से बहस करने में आज की पीढ़ी संकोच नहीं करती। जरा-सी विपरीत परिस्थिति आई और मानसिक तनाव को ऐसे हावी कर लेते हैं खुद पर कि पूरी दुनिया का भार उन पर ही है।

 

तनाव होने पर आगे-पीछे नहीं देखते। कोई भी आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। अपने जीवन को मजाक बना लेते हैं। सहन-सीमा तो होती नहीं। आत्महत्या जैसी कायराना हरकत करते हैं। यह भी नहीं सोचते कि इसका अंजाम क्या होगा, परिवार पर क्या बीतेगी। माता-पिता अनंत कष्ट सहकर भी आपको पालते हैं। कभी अपने दर्द की नुमाइश नहीं करते। हर कठिन पलों में, हर सुख त्यागकर आपकी खुशी के लिए हर वह कार्य करते हैं जिसकी आपको ज़रूरत होती है। लेकिन आप जैसे ही बड़े होते हैं, “मैं हूँ, मेरा है” और सिर्फ अपने बारे में ही सोचते हैं। जरा सोचिए! दुनिया में कई लोग हैं जो अभाव में, दर्द में, कठिनाई में भी जी रहे हैं। तो आप क्यों परेशान हो जाते हैं, बेचैन हो जाते हैं?

 

जाना तो सबको है, फिर समय से पहले हार क्यों मानना? सामना कीजिए, हिम्मत रखिए। और अपने स्वार्थ के लिए ही न सोचकर, औरों के हित, अपनों के प्यार के लिए, समाज की भलाई के लिए गरीब, दुखी और पीड़ित लोगों से अपने आप को जोड़ लीजिए। अपने दुख को पी लीजिए और सबकी खुशी के लिए प्रयास कीजिए। देखिए आँखों में उनके जिनका कोई सहारा नहीं, बेबस हैं, विकलांग हैं, अपनों का साथ नहीं, फिर भी जी रहे हैं। कभी किसी से शिकायत नहीं करते। क्या आप उनसे बदतर जी रहे हैं? आपका गम उनसे ज्यादा है? शायद नहीं। तो क्यों मरने की सोचते हैं आप? आपके पास घर है, परिवार है, रिश्ते हैं, पड़ोसी और मित्र हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी अभागे हैं जिनका कोई भी नहीं। तो आप सर्वश्रेष्ठ हुए न? तो निभाइए उन्हें, संभालिए जो साथ हैं। जीवन में आनंद भरें, प्रेम का उपहार दें और उदासी को हटा लें। आप दुनिया के सबसे सुखी व्यक्ति हैं। बाँटते रहिए दया, करुणा, सहयोग, अपनापन, मीठे बोल। समेटकर मत रखिए जो हैं आपके पास। मानवीय संवेदनाएँ औरों को देते रहें। बदले में आपको भी वही मिलेगा जो आप देंगे।

 

जब जिंदगी उपहार है तो परेशान होकर इसे खोना नहीं। और कभी भी छोटी-छोटी बातों को दिल से मत लेना। रोने से मन ज़रूर हल्का होता है, लेकिन समस्या तो हँसकर बाधाओं को पार करने से ही हल होती है। इसलिए रोकर खुद को कमजोर नहीं बनाना। कभी भी गलत कदम मत उठाइए। हजार बार सोचिए! जीवन से प्रेम करें। सब कुछ खो जाने पर भी हार न मानें। अपनी मेहनत, लगन और प्रयास से फिर सब पा सकते हैं। अपनी रुचि के अनुसार कार्य करें। मानकर चलें, हर लम्हा एक जंग है, जिंदगी और आपको जीतकर दिखाना है। जीवन एक उपजाऊ भूमि है। इसमें आप अपने कर्मों से, व्यवहार से जो बोएंगे, वही परिणाम के रूप में फसल बनकर उगेगा। लेकिन आप अपनी नकारात्मक सोच का खाद-पानी डालेंगे तो जीवन बंजर बन जाएगा। इसलिए जीवन बहुमूल्य है। इसे लापरवाही करके खोना नहीं, छोटी-छोटी बातों पर रोना नहीं। जिंदगी में सदा हँसते-गाते रहना चाहिए।

 

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