मीडिया प्रभारी अल्मोडा़ः दिनेश भट्ट
(नया अध्याय, देहरादून)
बीसीआई मान्यता विवाद: भवन बनता रहा, लेकिन विधि शिक्षा की बुनियाद क्यों डगमगाई?
अल्मोड़ाः सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में विधि शिक्षा से जुड़ा विवाद अब केवल बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की मान्यता तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं, प्रशासनिक जवाबदेही और छात्रों के भविष्य से जुड़े निर्णयों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
विश्वविद्यालय के विधि पाठ्यक्रम को 2024–27 के लिए BCI की अप्रूवल सूची में स्थान नहीं मिला है। इससे एलएलबी में अध्ययनरत और प्रवेश की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। छात्रों का आरोप है कि BCI की ओर से संबद्धता विस्तार के लिए समयसीमा कई बार बढ़ाए जाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका।
कुलपति का ‘भवन’ वाला तर्क क्या बताता है?
विवाद के बीच कुलपति की ओर से यह बात सामने आई है कि पिछले कुछ वर्षों में विधि संकाय के लिए भवन एवं आधारभूत ढांचे पर काम किया गया है। निश्चित रूप से किसी भी विधि संस्थान के लिए बेहतर भवन, पुस्तकालय, कक्षाएं, डिजिटल सुविधाएं और अन्य आधारभूत संरचनाएं जरूरी हैं।
लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल भवन और इंफ्रास्ट्रक्चर किसी विधि संकाय की गुणवत्ता और BCI मान्यता सुनिश्चित कर सकते हैं?
छात्रों का आरोप गंभीर लेकिन प्रमाण भी सामने आने चाहिए
छात्र और आमजन विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों पर यह आरोप लगा रहे हैं कि प्राथमिकता शैक्षणिक व्यवस्था से ज्यादा निर्माण कार्यों को दी जा रही है और निर्माण कार्यों में अनियमितता अथवा कमीशनखोरी की आशंका है।
इन आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, जब तक इनके समर्थन में निविदा, भुगतान, ठेके, जांच रिपोर्ट या अन्य दस्तावेज सामने न आएं। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए यह जरूर जरूरी है कि वह निर्माण कार्यों और उनसे संबंधित वित्तीय प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए, ताकि आरोपों पर स्वयं विराम लग सके।यदि 50 वर्ष पुराने संस्थान की मान्यता प्रक्रिया समय पर सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो नए भवनों के निर्माण के साथ शुरू होने वाले संस्थानों की मान्यता, शिक्षक व्यवस्था, प्रवेश, परीक्षा और परिणाम व्यवस्था को लेकर विश्वविद्यालय ने क्या ठोस तैयारी की है—इसका जवाब छात्रों और आम जनता को मिलना चाहिए।
क्योंकि विश्वविद्यालय की पहचान उसकी इमारतों की ऊंचाई से नहीं, बल्कि उन इमारतों के भीतर चलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सुरक्षित भविष्य से होती है।









