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म प्र मिडडे मील माफियाओं के शिकंजे मेंउत्तराखंड क्रांति दल इकाई अल्मोड़ा की बैठकराष्ट्रीय सुरक्षा के प्रहरी अजीत डोभाल का अपमान स्वीकार नहीं : भाजपा।मदमहेश्वर धाम के हक-हकूक की बहाली और माणा सरस्वती मंदिर के संरक्षण की मांग।मदमहेश्वर धाम के हक-हकूक की बहाली और माणा सरस्वती मंदिर के संरक्षण की मांग भैरव सेना ने एसडीएम ऊखीमठ के माध्यम से जिलाधिकारी व सरकार को भेजा ज्ञापन, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी ऊखीमठ । द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर धाम के हक-हकूकधारियों के पारंपरिक अधिकारों की बहाली और चमोली जिले के माणा स्थित मां सरस्वती मंदिर के संरक्षण की मांग को लेकर भैरव सेना संगठन (देवभूमि भैरव वाहिनी) ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी ऊखीमठ के माध्यम से जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग एवं राज्य सरकार को दो सूत्रीय ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में कहा गया कि ग्राम गौंडार के पंच कारबारियान—पवार, भंडारी और गौंडारी—सदियों से श्री मदमहेश्वर धाम की पूजा व्यवस्था, कपाट खोलने-बंद करने, भोग पकाने, चंदन घिसाई और देवरा यात्रा संचालन जैसी परंपरागत व्यवस्थाओं में अपनी भूमिका निभाते आ रहे हैं। संगठन का आरोप है कि वर्ष 2016 की बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की समीक्षा बैठक तथा पत्रांक 484 (2023) में लिए गए निर्णयों के बावजूद स्थानीय कारबारियों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। संगठन ने ऐतिहासिक धर्मशाला को एकतरफा संपत्ति घोषित किए जाने के प्रयास पर भी आपत्ति जताई। भैरव सेना ने मांग की कि श्री मदमहेश्वर धाम से जुड़े कारबारियों के पौराणिक एवं परंपरागत अधिकारों को सुरक्षित रखा जाए तथा प्रस्तावित ‘नियमावली-2026’ को प्रशासनिक मान्यता प्रदान की जाए। ज्ञापन में दूसरा मुद्दा भारत के प्रथम गांव माणा स्थित मां सरस्वती उद्गम स्थल और मंदिर परिसर से जुड़ा रहा। संगठन ने मंदिर परिसर में गैर-सनातन मानव-मूर्तियों की स्थापना का विरोध करते हुए मंदिर को बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के वैधानिक नियंत्रण में लेने की मांग उठाई। इस दौरान संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने कहा कि दोनों विषय धार्मिक परंपराओं, स्थानीय हक-हकूकधारियों और मंदिर व्यवस्थाओं से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि यदि शासन-प्रशासन और मंदिर समिति ने समय रहते मांगों पर संज्ञान नहीं लिया तो संगठन स्थानीय हक-हकूकधारियों एवं समर्थकों के साथ चरणबद्ध जनआंदोलन शुरू करेगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान कार्यक्रम संयोजक एवं भैरव सेना जिलाध्यक्ष रुद्रप्रयाग प्रदीप नगवाल, जिलाध्यक्ष देहरादून अनिल कुमार, मयंक मलेठा, संजय पंवार, गणेश जोशी, चंदन शर्मा, मनीष कुमार, बलवंत रावत, ओमप्रकाश केदारखंडी, शिवानंद पंवार (अध्यक्ष, श्री मदमहेश्वर धाम) सहित श्री मदमहेश्वर धाम एवं ग्राम गौंडार के हक-हकूकधारी और ग्रामीण मौजूद रहे।विश्व शांति दिवस पर राज विद्या केन्द्र ने आयोजित किया विशेष कार्यक्रम।लाखामंडल सेरा मिनी स्टेडियम में ब्लॉक स्तरीय क्रीड़ा प्रतियोगिता का भव्य आयोजन दो दिन तक चला खेलों का महाकुम्भ।छात्रसंघ चुनाव को लेकर अधिष्ठाता छात्र कल्याण, कुलानुशासक और जिला पुलिस के अधिकारियों की संभावित पदाधिकारियों के साथ बैठक।ग्राम प्रधानो की समस्याओं को लेकर हवालबाग प्रधान संगठन ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, 22 सितंबर को जिला मुख्यालय में करेंगे धरना-प्रदर्शन।जागतोली दशज्यूला महोत्सव में लोक संस्कृति की छटा महिला मंगल दलों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां, अनूप नेगी व कंचन भण्डारी के गीतों पर देर सांय तक झूमे दर्शक।

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मदमहेश्वर धाम के हक-हकूक की बहाली और माणा सरस्वती मंदिर के संरक्षण की मांग भैरव सेना ने एसडीएम ऊखीमठ के माध्यम से जिलाधिकारी व सरकार को भेजा ज्ञापन, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी ऊखीमठ । द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर धाम के हक-हकूकधारियों के पारंपरिक अधिकारों की बहाली और चमोली जिले के माणा स्थित मां सरस्वती मंदिर के संरक्षण की मांग को लेकर भैरव सेना संगठन (देवभूमि भैरव वाहिनी) ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी ऊखीमठ के माध्यम से जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग एवं राज्य सरकार को दो सूत्रीय ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में कहा गया कि ग्राम गौंडार के पंच कारबारियान—पवार, भंडारी और गौंडारी—सदियों से श्री मदमहेश्वर धाम की पूजा व्यवस्था, कपाट खोलने-बंद करने, भोग पकाने, चंदन घिसाई और देवरा यात्रा संचालन जैसी परंपरागत व्यवस्थाओं में अपनी भूमिका निभाते आ रहे हैं। संगठन का आरोप है कि वर्ष 2016 की बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की समीक्षा बैठक तथा पत्रांक 484 (2023) में लिए गए निर्णयों के बावजूद स्थानीय कारबारियों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। संगठन ने ऐतिहासिक धर्मशाला को एकतरफा संपत्ति घोषित किए जाने के प्रयास पर भी आपत्ति जताई। भैरव सेना ने मांग की कि श्री मदमहेश्वर धाम से जुड़े कारबारियों के पौराणिक एवं परंपरागत अधिकारों को सुरक्षित रखा जाए तथा प्रस्तावित ‘नियमावली-2026’ को प्रशासनिक मान्यता प्रदान की जाए। ज्ञापन में दूसरा मुद्दा भारत के प्रथम गांव माणा स्थित मां सरस्वती उद्गम स्थल और मंदिर परिसर से जुड़ा रहा। संगठन ने मंदिर परिसर में गैर-सनातन मानव-मूर्तियों की स्थापना का विरोध करते हुए मंदिर को बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के वैधानिक नियंत्रण में लेने की मांग उठाई। इस दौरान संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने कहा कि दोनों विषय धार्मिक परंपराओं, स्थानीय हक-हकूकधारियों और मंदिर व्यवस्थाओं से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि यदि शासन-प्रशासन और मंदिर समिति ने समय रहते मांगों पर संज्ञान नहीं लिया तो संगठन स्थानीय हक-हकूकधारियों एवं समर्थकों के साथ चरणबद्ध जनआंदोलन शुरू करेगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान कार्यक्रम संयोजक एवं भैरव सेना जिलाध्यक्ष रुद्रप्रयाग प्रदीप नगवाल, जिलाध्यक्ष देहरादून अनिल कुमार, मयंक मलेठा, संजय पंवार, गणेश जोशी, चंदन शर्मा, मनीष कुमार, बलवंत रावत, ओमप्रकाश केदारखंडी, शिवानंद पंवार (अध्यक्ष, श्री मदमहेश्वर धाम) सहित श्री मदमहेश्वर धाम एवं ग्राम गौंडार के हक-हकूकधारी और ग्रामीण मौजूद रहे।

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  • September 21, 2026
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म प्र मिडडे मील माफियाओं के शिकंजे में
उत्तराखंड क्रांति दल इकाई अल्मोड़ा की बैठक
राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रहरी अजीत डोभाल का अपमान स्वीकार नहीं : भाजपा।
मदमहेश्वर धाम के हक-हकूक की बहाली और माणा सरस्वती मंदिर के संरक्षण की मांग।

मदमहेश्वर धाम के हक-हकूक की बहाली और माणा सरस्वती मंदिर के संरक्षण की मांग भैरव सेना ने एसडीएम ऊखीमठ के माध्यम से जिलाधिकारी व सरकार को भेजा ज्ञापन, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी ऊखीमठ । द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर धाम के हक-हकूकधारियों के पारंपरिक अधिकारों की बहाली और चमोली जिले के माणा स्थित मां सरस्वती मंदिर के संरक्षण की मांग को लेकर भैरव सेना संगठन (देवभूमि भैरव वाहिनी) ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी ऊखीमठ के माध्यम से जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग एवं राज्य सरकार को दो सूत्रीय ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में कहा गया कि ग्राम गौंडार के पंच कारबारियान—पवार, भंडारी और गौंडारी—सदियों से श्री मदमहेश्वर धाम की पूजा व्यवस्था, कपाट खोलने-बंद करने, भोग पकाने, चंदन घिसाई और देवरा यात्रा संचालन जैसी परंपरागत व्यवस्थाओं में अपनी भूमिका निभाते आ रहे हैं। संगठन का आरोप है कि वर्ष 2016 की बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की समीक्षा बैठक तथा पत्रांक 484 (2023) में लिए गए निर्णयों के बावजूद स्थानीय कारबारियों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। संगठन ने ऐतिहासिक धर्मशाला को एकतरफा संपत्ति घोषित किए जाने के प्रयास पर भी आपत्ति जताई। भैरव सेना ने मांग की कि श्री मदमहेश्वर धाम से जुड़े कारबारियों के पौराणिक एवं परंपरागत अधिकारों को सुरक्षित रखा जाए तथा प्रस्तावित ‘नियमावली-2026’ को प्रशासनिक मान्यता प्रदान की जाए। ज्ञापन में दूसरा मुद्दा भारत के प्रथम गांव माणा स्थित मां सरस्वती उद्गम स्थल और मंदिर परिसर से जुड़ा रहा। संगठन ने मंदिर परिसर में गैर-सनातन मानव-मूर्तियों की स्थापना का विरोध करते हुए मंदिर को बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के वैधानिक नियंत्रण में लेने की मांग उठाई। इस दौरान संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने कहा कि दोनों विषय धार्मिक परंपराओं, स्थानीय हक-हकूकधारियों और मंदिर व्यवस्थाओं से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि यदि शासन-प्रशासन और मंदिर समिति ने समय रहते मांगों पर संज्ञान नहीं लिया तो संगठन स्थानीय हक-हकूकधारियों एवं समर्थकों के साथ चरणबद्ध जनआंदोलन शुरू करेगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान कार्यक्रम संयोजक एवं भैरव सेना जिलाध्यक्ष रुद्रप्रयाग प्रदीप नगवाल, जिलाध्यक्ष देहरादून अनिल कुमार, मयंक मलेठा, संजय पंवार, गणेश जोशी, चंदन शर्मा, मनीष कुमार, बलवंत रावत, ओमप्रकाश केदारखंडी, शिवानंद पंवार (अध्यक्ष, श्री मदमहेश्वर धाम) सहित श्री मदमहेश्वर धाम एवं ग्राम गौंडार के हक-हकूकधारी और ग्रामीण मौजूद रहे।

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